जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हाल में की गई हत्याओं के विरोध में शनिवार को जम्मू में विरोध प्रदर्शन हुए। इसके साथ ही घाटी से कश्मीरी पंडितों के वापस लौटने का सिलसिला जारी हो रहा है और लौटे कुछ कश्मीरी पंडित परिवारों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और अल्पसंख्यकों के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की।

कश्मीर घाटी में पिछले पांच दिन में आतंकवादियों ने सात लोगों की हत्या कर दी है। मारे गए लोगों में से चार अल्पसंख्यक समुदाय के थे। श्रीनगर से छह लोगों की हत्या की जानकारी प्राप्त हुई है। एक ऐसे ही कश्मीरी पंडित का कहना है कि, “मैं पिछले 20 वर्षों से एक अध्यापक के तौर पर काम कर रहा हूं और पदोन्नति के बाद कुछ साल पहले घाटी लौटा था।

लोगों को चुन कर मारे जाने से अचानक स्थिति खराब हो गई और हम वापस आ गए।” साथ ही उन्होंने बताया कि कश्मीर क्षेत्र में उनकी तैनाती के पिछले तीन साल के दौरान उन्हें कोई समस्या नहीं हुई। “हम अपने मुस्लिम सहयोगियों और पड़ोसियों के साथ भाई की तरह रहे” उन्होंने कहा।

दर्जनों कश्मीरी पंडित परिवारों को शेखपोरा छोड़ते हुए देखा जा रहा है। यह वह इलाका है जो 2003 में बडगाम जिले में खास कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। ऐसे ही एक अन्य कश्मीरी पंडित ने कहा कि हालिया हत्याओं के चलते वे लोग बहुत डरे हुए हैं।

इलाके से बाहर कदम रखने की उनकी हिम्मत नहीं हो रही है। “हम इस कॉलोनी के अंदर सुरक्षित हैं क्योंकि इसमें उचित सुरक्षा है, लेकिन हम काम के लिए बाहर नहीं जा सकते। हम में से कुछ को दफ्तरों में जाना पड़ता है और इस तरह हर समय घर के अंदर नहीं रह सकते हैं” उन्होंने कहा।