जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही टारगेट किलिंग से केंद्र सरकार की चिंता बढ़ने के बाद अब गृह मंत्रालय किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की शनिवार को इस मुद्दे पर साथ में चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक दोनों के बीच शनिवार को बैठक हुई, जहां गृहमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के साथ सुरक्षा परिदृश्य और घाटी में निर्दोष लोगों की हत्याओं से जुड़े मुद्दों पर संज्ञान लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को दिल्ली तलब किया था।

कश्मीर में महज तीन दिनों में पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित हैं। कश्मीरी पंडित फामेर्सी के मालिक, एक गैर-स्थानीय रेहड़ी वाले, एक सिख स्कूल के प्रिंसिपल और जम्मू संभाग के एक अनुसूचित जाति के शिक्षक को चुनिंदा निशाना बनाने के बाद घाटी में मुसलमानों और गैर-मुसलमानों दोनों के मन में भय और घबराहट का माहौल बना हुआ है।

मौजूद शीर्ष अधिकारियों ने करीब 5 घंटे तक चली बैठक में गृहमंत्री को केंद्र शासित प्रदेश और सीमावर्ती इलाकों की संपूर्ण सुरक्षा स्थिति से अवगत कराया।

एक अधिकारी ने बताया कि सूचना के मुताबिक आतंकियों ने नागरिकों को आसान निशाना बनाने की नीति अपनाई है। इसे लेकर शाह को सुरक्षा के प्रबंधन कड़े करने के लिए उठाए गए कदमों से भी अवगत कराया गया।

सरकार की आतंकियों को चुन-चुन कर मारने की योजना के तहत केंद्र ने अपने टॉप आतंक-रोधी एक्सपर्ट्स को घाटी भेजा है जो स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का सफाया करने में मदद करेंगे।

कहा जा रहा है कि बीते दिनों में हुए हमलों के पीछे पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा समर्थित द रेजिस्टेंस फोर्स का हाथ था। सुरक्षा एजेंसियों से आतंक रोधी एक्सपर्ट्स की टीम घाटी भेजने के साथ ही गृहमंत्री ने हमलों के साजिशकर्ताओं को भी पकड़ने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस ने जम्मू-कश्मीर में 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने शुक्रवार को कश्मीर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के इस्तीफे की मांग की।