पिछले सप्ताह ताइवान के पास सैन्य विमानों की बड़ी संख्या में आवाजाही के साथ चीन ने अपनी सैन्य शक्ति दिखाई है। उसने क्षेत्र में अपने प्रभुत्व का दावा करते हुए इस द्वीपीय देश की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

ताइवान के रक्षा मंत्री चिउ कुओ-चेंग ने जलडमरूमध्य के पार संबंधों को 40 वर्षों में सबसे अधिक तनावपूर्ण बताया। “मैंने अपने सैन्य जीवन के 40 से अधिक वर्षों में यह सबसे कठिन स्थिति देखी है” रक्षा मंत्री ने कहा, जो ताइवान के पूर्व जनरल भी रह चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक,अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि वह हवाई घुसपैठ पर चिंतित था। अमेरिका ने “ताइवान के पास चीन की उत्तेजक सैन्य गतिविधि” के रूप को अस्थिर, गलत अनुमानों का जोखिम और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करने वाला बताया।

इस सप्ताह अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और चीन के शीर्ष राजनयिक और पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जिएची के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता में ताइवान के तनाव की आशंका है।

ताइवान क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच फ्रांसीसी सीनेटर एलन रिचर्ड की अगुआई में एक समूह ताइवानी राष्ट्रपति साई इंग-वेन समेत देश के आर्थिक व स्वास्थ्य अधिकारियों और मुख्य भूमि मामलों की परिषद के साथ बैठक करेगा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस में चीन के राजदूत लू शाय ने फरवरी में रिचर्ड को ताइवान यात्रा रद्द करने के लिए एक चेतावनी पत्र भेजा था। इस यात्रा से चीन को फटकार लगने की संभावना है, जो स्व-शासित ताइवान को अपना क्षेत्र होने का दावा करता है और जिस वजह से वह ताइवान के साथ किसी भी अंतरराष्ट्रीय संबंध और है विदेशी सरकारी अधिकारियों की यात्रा का विरोध करता है।

इसी बीच, चीन द्वारा ताइवान हवाई क्षेत्र में चार दिन में सैकड़ों जंगी विमान भेजने के बाद ब्रिटेन और अमेरिका ने भी दक्षिण चीन सागर में तीन विमान वाहक पोत तैनात कर संदेश दिया है कि वे किसी भी हालात से निपटने को तैयार हैं।