चुनाव आयोग ने शनिवार को चिराग पासवान और पशुपति पारस के नेतृत्व वाले लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपा) के दोनों गुटों के बीच विवाद के सुलझने तक पार्टी के प्रतीक को फ्रीज करने का फैसला लिया है।

अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा, “जब आयोग अपने पास इस जानकारी से संतुष्ट हो जाता है कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी वर्ग या समूह हैं, जिनमें से प्रत्येक उस पार्टी के होने का दावा करता है, तो आयोग सभी को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध तथ्यों और मामले की परिस्थितियों और वर्गों या समूहों और अन्य व्यक्तियों के ऐसे प्रतिनिधियों को सुनने की इच्छा के रूप में सुनवाई कर यह तय करें कि ऐसा एक प्रतिद्वंद्वी वर्ग या समूह या समूहों का ऐसा कोई भी प्रतिद्वंद्वी वर्ग मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का नहीं है और आयोग का निर्णय ऐसे सभी प्रतिद्वंद्वी वर्गों या समूहों के लिए बाध्यकारी होगा।”

चुनाव आयोग की तरफ से चिराग पासवान तथा पशुपति पारस को यह बड़ा झटका है। चुनाव आयोग के बयान के अनुसार दोनों गुटों को पार्टी का चुनाव चिह्न् उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल दोनों गुटों को अंतरिम उपाय के तौर पर, उनके समूहों के नाम और उनके उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न् आवंटित किए जा सकते हैं।

इससे पहले दोनों गुटों (चिराग और पशुपति समूह) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर दावा किया था कि पार्टी का बंगला चुनाव चिन्ह उनका है। चिराग पासवान ने आयोग से कहा कि पशुपति पारस गुट ने अवैध रूप से पार्टी को अपने कब्जे में लिया है।

फिलहाल चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की मांग खारिज कर दी है। गौरतलब हो कि बिहार में इसी महीने विधानसभा के उपचुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर लोजपा ने भी इसमें उम्मीदवारों को उतारने का फैसला किया है।

ऐसे में जब केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने लोजपा के चुनाव चिन्ह बंगले पर रोक लगा दी है तो चिराग पासवान और पशुपति पारस, दोनों गुटों के लिए उपचुनाव में मुश्किलें आ सकती हैं। इस समय बिहार की दो विधानसभा उपचुनाव सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है।

लोजपार में यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीते महीने जून में पांच सांसद चिराग पासवान से अलग होकर पशुपति पारस के खेमे में चले गए और अघोषित तौर पर पशुपति पारस ने एक अलग खेमा बना लिया।

जिसे बाद चाचा पशुपति पारस ने स्वयं को रामविलास पासवान का उत्तराधिकारी घोषित करते हुए खुद को पार्टी अध्यक्ष घोषित किया। इस बीच लोकसभा में, पशुपति पारस गुट को अध्यक्ष ओम बिरला ने लोजपा के तौर पर मान्यता दे दी और केंद्र की मोदी सरकार में भी वह लोजपा कोटे से मंत्री भी हैं।

आयोग का कहना है कि दोनों धड़ों को अलग-अलग चुनाव चिह्न जारी किए जाएंगे। दोनों धड़े निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार विधानसभा के दो क्षेत्रों के उपचुनाव के लिए अधिसूचित किए गए चुनाव चिह्नों में से इनका चयन कर सकते हैं।