सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की तत्काल बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि “मैं उन कांग्रेसियों की ओर से बोल रहा हूं, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में पत्र लिखा था। केंद्रीय अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी और केंद्रीय चुनाव समिति के पद के चुनाव के संबंध में हमारे नेतृत्व द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हमारी पार्टी में कोई अध्यक्ष नहीं है इसलिए हमें नहीं पता कि ये निर्णय कौन ले रहा है। हम जानते हैं और फिर भी हम नहीं जानते। चर्चा के लिए तुरंत सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाई जाए। हम ‘जी 23’ हैं, ‘जी हुजूर 23’ नहीं हैं।

यह बहुत स्पष्ट है। हम बात करते रहेंगे। हम अपनी मांगों को दोहराना जारी रखेंगे।” इससे पहले दिन में कपिल सिब्बल ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर बुधवार को पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे और मांग की कि सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होकर संगठनात्मक चुनाव कराए जाने चाहिए।

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल उन 23 पार्टी नेताओं में से एक हैं जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिख कई संगठनात्मक सुधारों की मांग की गई थी। हालांकि इस पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि “सोनिया गांधी जी ने यह सुनिश्चित किया था कि संगठनात्मक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद कपिल सिब्बल केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनें। पार्टी में सभी की बात सुनी जा रही है। सिब्‍बल और अन्य लोगों को बताना चाहते हैं कि उन्हें उस संगठन को नीचा नहीं दिखाना चाहिए जिसने उन्हें एक पहचान दी।”

गुलाम नबी आजाद भी उन 23 प्रमुख नेताओं के समूह में शामिल हैं जिन्होंने पिछले वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस में संगठन चुनाव करवाने की मांग की थी। वहीं, इस समूह के एक नेता जितिन प्रसाद अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

आजाद ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग उस वक्त की है जब हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फालेरयो और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ दी है।