पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ कई समर्थक मंत्रियों ने भी इस्तीफा दिया है जिसमें कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष गुलजार इंदर चहल और पंजाब कांग्रेस के महासचिव योगेंद्र ढींगरा और गौतम सेठ जैसे नाम शामिल रहे।

20 सितंबर को चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद माना जाने लगा कि पंजाब में अब सब ठीक है, लेकिन 8 दिन बाद ही सिद्धू ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंप दिया।

ऐसी खबरें आने लगी हैं कि सिद्धू ने मुख्यमंत्री चन्नी से नाराज होकर इस इस्तीफे की पेशकश की। इस घटना के बाद चन्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- “मैं सब सही करने की कोशिश करूंगा। अगर सिद्धू नाराज हैं तो उनसे मिलकर बात की जाएगी। सब ठीक हो जाएगा। मुझे सिद्धू पर पूरा भरोसा है।”

इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर इस्तीफे का ऐलान किया था। पत्र में उन्होंने लिखा था कि “किसी भी इंसान के चरित्र का पतन उसके समझौते की वजह से ही होता है।

मैं कभी भी पंजाब के भविष्य और उसके हितों के साथ समझौता नहीं कर सकता। इसलिए पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। मैं कांग्रेस की सेवा करना जारी रखूंगा।”

राजनीतिक जानकारों का इस इस्तीफे के पीछे यह मानना है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों के निर्धारण में सिद्धू की सलाह को ज्यादा महत्व नहीं दिया,यह बात पर सिद्धू को अखर गई।

यह भी कहा जा रहा है कि पहले ही वह मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने से नाराज थे और फिर कैप्टन के करीबियों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से उनकी नाराजगी बढ़ी। एडवोकेट जनरल और डीजीपी की नियुक्ति में भी सिद्धू की नहीं चली तो इसके अलावा सीएमओ में भी अफसरों की नियुक्ति को लेकर भी चन्नी ने भी खुद ही फैसला लिया। इन सब घटनाक्रम से सिद्धू खुश नहीं थे।

इन सब मसलों के बीच से पंजाब में कांग्रेस के भीतर से ही फ्लोर टेस्ट की मांग भी उठने लगी है। मंगलवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह खेमे के विधायकों ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग कर दी।

उससे पहले आम आदमी पार्टी ने नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के दिन ही फ्लोर टेस्ट की मांग की थी। इन मौजूदा हालातों में कांग्रेस अंदर से ही तीन भागों में बंटी हुई नजर आती है जिसमें एक खेमा कैप्टन अमरिंदर सिंह,दूसरा खेमा नवजोत सिंह सिद्धू तो वहीं, तीसरा खेमा नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री चन्नी का भी बन गया है। अब तीनों ही खेमे के नेता यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास ज्यादातर विधायक हैं।

इस पूरे मसले पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री चन्नी ने बुधवार को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है जिसमें सभी कैबिनेट मंत्रियों को शामिल होने को कहा गया है।