कन्हैया कुमार के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा ने कहा कि कन्हैया कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति सच्चे नहीं थे। राजा ने कहा कि कन्हैया कुमार की ‘व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं होनी चाहिए’ और कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का उनका निर्णय दर्शाता है कि ‘उन्हें मजदूर वर्ग की विचारधारा में कोई विश्वास नहीं है’।

“उन्होंने खुद को मेरी पार्टी से निकाल दिया है। भाकपा जाति-विहीन, वर्ग-विहीन समाज के लिए लड़ रही है। उसकी कुछ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएँ और आकांक्षाएँ रही होंगी। यह दर्शाता है कि उसे कम्युनिस्ट और वर्ग विचारधारा में काम करने में कोई विश्वास नहीं है” डी राजा ने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि सीपीआई कन्हैया के शामिल होने से पहले मौजूद थी और उनके निष्कासन के बाद भी सफल होगी। पार्टी उनके साथ खत्म नहीं होगी। हमारी पार्टी निस्वार्थ संघर्ष और बलिदान के लिए है। वह मेरी पार्टी के लिए सीधे और सच्चे नहीं थे” डी राजा ने आगे कहा।

कन्हैया कुमार के इस तरह से कांग्रेस के साथ आने को लेकर पार्टी सांसद मनीष तिवारी ने भी तंज कसा है। उन्होंने कम्युनिस्ट विचारक रहे कुमारमंगलम की पुस्तक ‘कम्युनिस्ट्स इन कांग्रेस’ का हवाला देते हुए एक पोस्ट किया है जिससे यह प्रतीत होता है कि वह पार्टी पर कटाक्ष कर रहे हैं।

लोकसभा सांसद ने ट्वीट करते हुए लिखा,”कुछ कम्युनिस्ट नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें हैं। अब शायद 1973 की पुस्तक ‘कम्युनिस्ट्स इन कांग्रेस’ के पन्ने फिर से पलटे जाएं। लगता है कि चीजें जितनी ज्यादा बदलती हैं, वो उतना ही पहले की तरह बनी रहती हैं।

आज इसे फिर से पढ़ता हूं।” इससे माना जा रहा है कि मनीष तिवारी भी उन नेताओं में से हैं जिन्हें कन्हैया और जिग्नेश मेवानी के पार्टी में शामिल होने से थोड़ी दिक्कत है। हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है। लेकिन बीते कई दिनों से पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे तिवारी का ट्वीट कांग्रेस में पहले मुखर विरोध के तौर पर सामने आया है।

वहीं कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर कन्हैया कुमार ने कहा है कि वह देश की ‘सबसे पुरानी और सबसे लोकतांत्रिक पार्टी’ में शामिल हो रहे हैं और उनके जैसे कई लोगों का विचार था कि कांग्रेस पार्टी को बचाना ही देश बचाने का एकमात्र तरीका है।

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि एक विचारधारा इस देश के मूल्यों, संस्कृति, इतिहास और भविष्य को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है।

करोड़ों युवाओं को लगता है कि कांग्रेस को बचाए बिना इस देश को नहीं बचाया जा सकता। कांग्रेस एक बड़े जहाज की तरह है, ‘अगर यह बच गई है, तो आकांक्षाएं, महात्मा गांधी की एकता, भगत सिंह के साहस और बीआर अंबेडकर के समानता के विचार की रक्षा की जाएगी।”