उत्तर प्रदेश में चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार के कैबिनेट का विस्तार हुआ। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद सहित सात नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।

जितिन प्रसाद को जहां कैबिनेट मंत्री बनाया गया तो वहीं पलटू राम, संजीव कुमार, संगीता बिंद, दिनेश खटिक, धर्मवीर प्रजापति और छत्रपाल गंगवार राज्यमंत्री के पद पर विराजमान हुए।

सभी को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस विस्तार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक धोखा बताते हुए कहा कि “उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार भी एक छलावा है। साढ़े चार साल जिनका हक मारा आज उनको प्रतिनिधित्व देने का नाटक रचा जा रहा है।

जब तक नये मंत्रियों के नामों की पट्टी का रंग सूखेगा तब तक तो 2022 चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी। भाजपाई नाटक का समापन अंक शुरू हो गया है।”

हालांकि इस मंत्रिमंडल विस्तार को कई नजरिए से देखा जा रहा है। भाजपा की कोशिश राज्य के जातिगत समीकरणों को बैलेंस करने की होगी क्योंकि जिन चेहरों के मंत्री बनने की चर्चा है, उनकी जातियां उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम जगह रखती हैं। विस्‍तार के जरिए यह उद्देश्‍य भी होगा कि जाति के आधार पर बनी अन्य पार्टियों के प्रभाव को कम किया जाए।

राज्य में ब्राह्मण वोट बैंक पर इस बार हर पार्टी की नजर है। इसे साधने की कोशिश में जुलाई में बहुजन समाज पार्टी(बसपा) ने अयोध्‍या में ब्राह्मणों का एक सम्‍मेलन किया, फिर अगस्‍त में समाजवादी पार्टी(सपा) ने जिला स्‍तर पर ब्राह्मण सम्‍मेलन करने शुरू किए।

जितिन प्रसाद जिस तरह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए,उसे भी ब्राहाणवाद की राजनीति से जोड़कर देखा गया। इधर भाजपा को परंपरागत रूप से सवर्ण जातियों की पार्टी माना जाता है।

2017 के चुनाव में अपने दम पर बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा यह ताकत गंवाना नहीं चाहेगी क्योंकि पिछले तीन चुनावों में पार्टी को ब्राह्मणों के समर्थन से 40 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल हुए हैं। योगी के तीसरे मंत्रिमंडल विस्‍तार में शामिल नए चेहरों में तीन ओबीसी हैं।

बसपा के समीकरण की गति को मध्यम करने के मकसद से अवध क्षेत्र के बलरामपुर से पल्टू राम और मेरठ के हस्तिनापुर से दिनेश खटीक को राज्यमंत्री बनाया गया है। निषाद समाज में अपना संदेश फैलाने के लिए पार्टी की तरफ़ से डॉ. संगीता बलवंत को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।

डॉ. संगीता मंत्रिमंडल में महिला और युवा चेहरे के तौर पर होने के साथ ही निषाद समाज के शिक्षित वर्ग से हैं। छात्र जीवन से राजनीति से जुड़े रहने के साथ ही वह वकालत के पेशे से भी हैं। उन्हें शामिल कर पार्टी निषाद समाज में शिक्षित लोगों को आगे आने का संदेश देकर प्रेरित करने का प्रयास करेगी।