चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में शामिल किया गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, प्रशांत किशोर 159-भवानीपुर से मतदाता है।

भवानीपुर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट भी है और वह यहां से उपचुनाव भी लड़ रही हैं। अब ममता की सीट पर प्रशांत किशोर के मतदाता के तौर पर शामिल होने की वजह सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) प्रशांत किशोर को पश्चिम बंगाल की भवानीपुर से राज्यसभा में भेजने की तैयारी कर रही है? यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि वह तृणमूल कांग्रेस के सलाहकार भी रहे हैं। हालांकि अभी तक इस पर टीएमसी ने स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं है।

गौरतलब हो कि पश्चिम बंगाल में 30 सितंबर को होने वाले उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से उम्मीदवार हैं।

टीएमसी के नेता सौगत रॉय के बयान से यह बात उठी जब उन्होंने कहा कि अगर कोई राज्यसभा चुनाव में हिस्सा लेना चाहता है तो जरुरी है कि वो उस राज्य का वोटर हो। सौगत रॉय ने कहा, “मैं देखता हूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

वह एक भारतीय नागरिक हैं और किसी भी राज्य के वोटर बन सकते हैं। दूसरी बात यह है कि अगर कोई राज्यसभा का चुनाव लड़ना चाहता है तो जरुरी है कि वो उस राज्य का वोटर हो। मैं उनकी योजना के बारे में नहीं जानता।”

हालांकि प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा भी चल रही थी। इस फैसले पर अंतिम मुहर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की लगेगी जिसे लेकर वह कई वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर चुकीं हैं।

सूत्रों के मुताबिक इनमें से कुछ नेताओं ने प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल होने पर आपत्ति जताई, जबकि अन्य ने इसका समर्थन किया है क्योंकि उन्हें लगता है कि वह पार्टी के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

हालांकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के बाद भाजपा का हमला जारी हो गया है। पश्चिम बंगाल भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी सप्तर्षि चौधरी ने वोटर लिस्ट की फोटो ट्वीट कर लिखा है कि “आखिरकार प्रशांत किशोर भवानीपुर के मतदाता बन गए।

क्या बंगाल की बेटी अब बहिरगातो (बाहरी) मतदाता के पक्ष में है या नहीं” जिसपर टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष को टैग करते हुए उन्होंने पूछा- “प्रदेश की जनता जानना चाहती है।”

ज्ञात हो कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं। अब पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा में उनका नाम एक वोटर के तौर पर दर्ज होने के बाद भाजपा द्वारा सवाल उठाया गया कि चुनाव आयोग को इस बात की जांच करनी चाहिए कि क्या उनका नाम बिहार की लिस्ट से हट गया है?