प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार के दिन एक बार फिर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए राष्ट्र को संदेश दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने जनधन खातों को लेकर देश में शुरू किए गए अभियान की वजह से गरीबों को उनके हक का पैसा सीधा उनके खाते में जाने के कारण भ्रष्टाचार जैसे रुकावटों में बहुत बड़ी मात्रा में कमी आने की बात कही।

उन्होंने आगे बताया कि पिछले अगस्त महीने में यूपीआई से 355 करोड़ लेनदेन होने से आज औसतन 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का डिजिटल पेमेंट यूपीआई से हो रहा है जिससे देश की अर्थव्यवस्था में स्वच्छता, पारदर्शिता आ रही है।

आज के नौजवानों को साफ-सफाई के अभियान द्वारा कैसे आज़ादी के आंदोलन को निरंतर ऊर्जा मिली, इसका जिक्र भी उन्होंने किया। “ये महात्मा गांधी ही तो थे, जिन्होंने स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने का काम किया था। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था।” प्रधानमंत्री ने अपनी बातों में कहा।

उन्होंने आगे विश्व नदी दिवस पर चर्चा की। उन्होंने नदियों को हमारे लिए जीवंत इकाई है और देश में इसे मां मानने की परंपरा के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह घर में बच्चे हर दिवस को याद रखते हैं वैसे ही नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को नदी उत्सव जरूर मनाना चाहिए। पानी की एक-एक बूंद की अहमियत को समझाने का प्रयास भी उन्होंने किया।

मोदी पंडित दीनदयाल द्वारा दी गई सीख के बारे में बताया पंडितजी से यह सीखने को मिलता है कि हमारे पास जो कुछ भी है, वो देश की वजह से ही तो है इसलिए देश के प्रति अपना कर्ज कैसे चुकाएंगे, इस बारे में सोचना चाहिए। इसे आज के युवाओं के लिए उन्होंने बहुत बड़ा संदेश बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में लोगों के भीतर हेल्थकेयर और वेलनेस को लेकर जिज्ञासा और जागरूकता बढ़ी है। आज के हालात में जिस प्रकार मेडिसिनल प्‍लांट और हर्बल उत्पादों को लेकर दुनिया भर में लोगों का रुझान बढ़ा है, उसमें भारत के पास उन्होंने बड़ी संभावनाएं बताई।

प्रधानमंत्री ने यह भी सीख दी कि कभी भी छोटी बात को और छोटी चीज को छोटी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “अगर हम महात्मा गांधी के जीवन की तरफ हम देखेंगे तो हम हर पल महसूस करेंगे कि छोटी-छोटी बातों की उनके जीवन में कितनी बड़ी अहमियत थी और छोटी-छोटी बातों को ले करके बड़े बड़े संकल्पों को कैसे उन्होंने साकार किया था।

हमारे आज के नौजवान को ये जरूर जानना चाहिए कि साफ-सफाई के अभियान ने कैसे आजादी के आंदोलन को एक निरंतर ऊर्जा दी थी। ये महात्मा गांधी ही तो थे, जिन्होंने स्वच्छता को जन-आन्दोलन बनाने का काम किया था।”