प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से प्रहार करते हुए कहा कि प्रतिगामी सोच वाले जो देश आतंकवाद का राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें समझना होगा कि यह उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है।

उन्होंने कहा कि जहां भारत अपनी आजादी के 75वें साल में 75 स्वदेशी उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है तो वहीं कुछ देश आतंकवाद का राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि कोई भी देश अफगानिस्तान के नाजुक हालात का फायदा उठाने की कोशिश नहीं करें।

उन्होंने कहा “यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि आप अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए ना हो। यह समय वहां की जनता महिलाओं,बच्चों के साथ ही वहां के अल्पसंख्यकों की मदद करने का है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया के सामने प्रतिगामी सोच और अतिवाद का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पूरे विश्व को वैज्ञानिक और प्रगतिशील सोच को विकास का आधार बनाना चाहिए।

कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया का पहला डीएनए टीका बनाया है, जिसे 12 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। साथ ही भारत नाक से दिए जाने वाले टीके के निर्माण में भी जुटा है।

दुनिया भर के टीका निर्माता भारत में आकर उत्पादन करें उन्होंने ऐसा आवाहन भी किया। लोकतंत्र का गौरवगान करते हुए मोदी ने भारत में लोकतंत्र की परंपरा को हजारों साल पुराना बताते हुए उसे लोकतंत्र की जननी बताया।

उन्होंने कहा कि “हमारी विविधता हमारे मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।” खुद के संघर्षों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “हमारे लोकतंत्र की ताकत इस बात से दिखती है कि एक छोटा लड़का जो कभी चाय की दुकान पर अपने पिता की मदद करता था, आज भारत का प्रधानमंत्री है।”

इसके साथ ही उन्होंने भारत की उपलब्धियों और अहमियतों को भी सामने रखते हुए कहा कि भारत में हो रही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित नई चीजें विश्व की बहुत मदद कर सकती है।

कैशलेस ट्रांजैक्शन के दौर में यूपीआई के जरिए भारत में हर महीने 350 करोड़ लेनदेन होने की बात भी उन्होंने बताई, साथ ही सात सालों में देश ने 43 करोड़ लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, इस बात पर प्रधानमंत्री ने गर्व भी दिखाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को समुद्रों को विस्तारवाद और दूसरों को इसके इस्तेमाल से दूर रखने की होड़ से बचाना होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह नियम आधारित विश्व व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए एक साथ आवाज उठाएं।

इससे संबंधित प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की बात उठाई जो पिछले कुछ समय से हिंद-प्रशांत महासागर के क्षेत्र में अपना सैन्य विस्तार करने में लगा हुआ है।

उन्होंने समुद्रों को साझा विरासत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा के तौर पर बताया।  इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा संपन्न हो गई जिसके बाद वह शनिवार को ही भारत के लिए रवाना हो गए।