अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने आत्महत्या कर ली। हालांकि अभी उनकी मौत के कारणों का पता नहीं चल पा रहा हैं और पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वह 72 वर्ष के थे।

हरिद्वार में लगे कुम्भ के दौरान महंत नरेंद्र गिरी महाराज को कोरोना से पीड़ित होने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महामारी से ठीक होने के बाद अपने आश्रम आ गए थे और उनकी देखरेख की जा रही थी। अचानक मौत की मिली खबर से सब सदमे में हैं। ठोस जानकारी ना होने से अब अफवाहों का बाजार भी गर्म हैं। उनकी मौत को संग्दिध बताया जा रहा हैं।

महाराज का शव प्रयागराज स्थित गेस्ट हाउस से फंदे से लटके अवस्था में बरामद किया गया। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। इसके साथ ही पुलिस को शव के पास से सुसाइड नोट भी मिला जिसमें एक शिष्य से दुखी होने की बात लिखी गई है। हालांकि अभी पुलिस ने साफ तौर पर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। पिछले दिनों नरेंद्र गिरि का उनके शिष्य आनंद गिरि से विवाद हुआ था जिसे देखते हुए पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला बता रही है।

फाॅरेंसिक टीम और स्पेशल टीम मामले की जांच कर रही है। आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह ने कहा “हमें जैसे ही सूचना मिली, हम घटनास्थल पर पहुंचे। हमने देखा कि महाराज जी जमीन पर लेटे हैं, फैन पर रस्सी फंसी हुई थी और महंत जी मृत्यु हो चुकी थी। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या लग रहा है। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला जिसमें उन्होंने अपने आश्रम को लेकर वसीयतनामा लिखा है। नोट में लिखा है कि उन्होंने आत्महत्या की और वह अपने किसी शिष्य से दुखी थे। शव गेस्ट हाउस से मिला है। सुसाइड नोट में आनंद गिरि और कई शिष्यों का नाम है।”

महंत के निधन पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने टि्वटर हैंडल पर लिखा “अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेंद्र गिरि जी का देहावसान अत्यंत दुखद है। आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए उन्होंने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति!!”

“अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि जी का ब्रह्मलीन होना आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है।प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल अनुयायियों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!” योगी आदित्यनाथ ने लिखा। अखिलेश यादव ने भी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

वहीं मामले पर आनंद गिरि बोले “अभी मैं हरिद्वार में हूं, कल प्रयागराज पहुंचकर देखूंगा क्या सच है। हमें अलग इसलिए किया गया ताकि एक का काम तमाम हो सके।” नरेंद्र गिरि से विवादों पर आनंद गिरि ने बताया कि “मेरा उनसे नहीं मठ की जमीन को लेकर विवाद था। शक के दायरे में कई लोग हैं, उन्होंने ही नरेंद्र गिरि को मेरे खिलाफ किया।”