कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। राजभवन जाकर उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। सूत्रों के मुताबिक 60 विधायकों द्वारा अमरिंदर सिंह को हटाने की मांग या कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी में शामिल होने की धमकी दी थी जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री

अमरिंदर से यह पद छोड़ने को कहा। कहा जा रहा है कि राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस विधायकों ने पार्टी आलाकमान से इस बदलाव के लिए कहा था। सूत्रों के मुताबिक माने तो अमरिंदर सिंह उर्फ ​​”कैप्टन” ने कथित तौर पर सोनिया गांधी से कहा था कि इस तरह का अपमान काफी है और यह उनके साथ तीसरी बार हो रहा है, अतः इस तरह के अपमान के साथ वह पार्टी में नहीं रह सकते। इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कैप्टन ने कहा, ”जिस पर आलाकमान को भरोसा है, उसे पंजाब का अगला मुख्यमंत्री बनाए। मुझे ऐसा लगा कि उन्हें मुझपर भरोसा नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अभी वह कांग्रेस में ही बने हुए हैं और भविष्य में समय आने पर आगे का फैसला लेंगे।

उधर, इस इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के विधायक दलों की शाम पांच बजे बैठक होगी और माना जा रहा है कि उसमें नए विधायक दल के नेता का चुनाव किया जा सकता है। कैप्टन के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में फूट की आशंका से पूरी तरह से इनकार नहीं किया सकता क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू में पहले से ही उथल-पुथल बनी हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक, कैप्टन ने सोनिया गांधी को फोन करके एआईसीसी द्वारा बिना उन्हें विश्वास में लिए कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाए जाने पर ऐतराज दर्ज कराया था और कहा कि अगर इसी तरह से पार्टी में उन्हें दरकिनार किया जाता रहा तो वो बतौर मुख्यमंत्री बने रहने के इच्छुक नहीं होंगे।

अब इस मसले पर भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमला बोल रही है। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज द्वारा कहा गया कि “जहाज जब डूबने वाला होता है तो हिचकोले खाने लगता है।” अंबाला में उन्होंने कहा कि “पंजाब कांग्रेस उसी प्रकार ने हिचकोले खा रही है। इसी वजह से इनका आपसी टकराव हो रहा है।”