तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को तेज़ी देने के लिए देशभर के किसान पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में खड़े होंगे।

उत्तर प्रदेश में पांच सितंबर को प्रस्तावित किसान महापंचायत का आयोजन किया गया है जिसमें चार राज्यों, उत्तर प्रदेश विशेषकर वेस्ट उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब से भीड़ आने की संभावना है।

जीआईसी ग्राउंड में होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत को लेकर तैयारी युद्ध स्तर पर की जा रही है। ग्राउंड में मंच बनाने से लेकर टेंट लगाने और लाउड स्पीकर लगाने का काम किया जा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत के बेटे चरण सिंह टिकैत ने बताया कि महापंचायत में करीब सात लाख किसान पहुंचेंगे। पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली इस महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा देशभर के 300 से ज्यादा सक्रिय संगठन जिनमें करीब 60 किसान संगठन होंगे और अन्य कर्मचारी, मजदूर, छात्र, शिक्षक, रिटायर्ड अधिकारी, सामाजिक, महिला आदि संगठन है, उन्हें शामिल किया जाएगा।

किसानों के 40 संगठन अग्रणी भूमिका में रहेंगे, जबकि 20 संगठन पूरा सहयोग करेंगे। इस महापंचायत पर सरकार से लेकर विपक्षी दलों तक की भी नजर है। मोर्चा के सदस्यों को पूरी उम्मीद है कि इससे कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को नई दिशा मिलेगी।

संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, जगजीत सिंह दल्लेवाल ने बताया कि 22 राज्यों के प्रतिनिधियों से सहमति मिली है और 300 से ज्यादा किसान व अन्य संगठन के लोग शामिल होंगे। पंजाब से 100 संगठन रहेंगे, जिनमें 40 किसान व अन्य मजदूर, कर्मचारी, छात्र आदि संगठन है।

भारतीय किसान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलिक के मुताबिक मुजफ्फरनगर की महापंचायत इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी किसान महापंचायत होगी जो कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन व संयुक्त किसान मोर्चा के मिशन यूपी की दिशा तय करेगी।

उन्होंने चेताया कि सरकार द्वारा अगर कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया गया व एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनाया गया तो मोर्चा उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी महापंचायत के माध्यम से आंदोलन तेज करेगा।

धर्मेंद्र मलिक ने आगे बताया कि महापंचायत में तीनों कृषि बिल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के किसानों की समस्या जैसे गन्ने का बकाया भुगतान, बिजली की बढ़ी कीमतें, डीजल-पेट्रोल आदि की आसमान छूती कीमतों को लेकर भी चर्चा होगी।

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