बिहार राज्य में सब्जी उत्पादक किसानों को अब अपना उत्पाद बेचने के लिए बाजार जाने की जरूरत नहीं होगी। उनके लिए पहली बार डिजिटल तरीके से ‘तरकारी ऐप’ शुरू किया जा रहा है।

उन्हें केवल ‘तरकारी ऐप’ पर सब्जी की मात्रा और दर डालनी होगी जिसके बाद सब्जी उत्पादकों की समिति खुद उनके खेत में जाकर सब्जी खरीदेगी। इसकी शुरुआत बिहार के सहकारिता विभाग द्वारा की जा रही है।

सहकारिता विभाग जल्द ‘तरकारी ऐप’ विकसित कर किसानों के लिए जारी कर देगा। खास बात यह है कि यह एप इंटरेक्टिव होगा यानी दोनों ओर से दर को लेकर मोल-जोल भी किया जा सकेगा।

साथ ही यह जानकारी भी दी जा सकेगी कि उनके खेत की सब्जी किस दिन, कितनी मात्रा में तोड़ी जा सकेगी। इस पूरी व्यवस्था की शर्त यह है कि सब्जी उत्पादक किसानों को अपने जिले की सब्जी उत्पादक समिति से जुड़ना होगा। अभी राज्य के मात्र लगभग 25 हजार किसान ही समितियों से जुड़े हैं।

राज्य में वर्तमान में सब्जी के ग्राहकों के लिए वेजफेड ने पिछले कोरोना काल में ऐप बनाया था। उस एप के माध्यम से व्यापार हो भी रहा है। लेकिन किसानों की शिकायत थी कि समितियों के अध्यक्ष अपने चहेते किसानों की सब्जी ले लेते हैं और दूसरे किसानों को सब्जी बाजार ले जानी पड़ती है।

इसी शिकायत के निवारण के लिए विभाग ने नया ऐप बनाने का फैसला लिया। ऐप पर सबकुछ सबके सामने रखा जाएगा। किसान सब्जी की उपलब्धता और तोल-मोल कर समितियों को उसका उत्पाद खरीदना ही होगा। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी।

सब्जी उत्पादक किसानों के लिए सरकार कई तरह की व्यवस्था कर रही है। वेजफेड ने इस व्यवस्था के लिए किसानों का सर्वे भी करा लिया है, लेकिन संस्था आंकड़े को सार्वजनिक नहीं करेगी। विधानसभा में भी एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने आंकडे़ जारी करने से मना कर दिया था।