प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय हर क्षेत्र में छवि सुधारने को लेकर तत्पर दिख रहे हैं। वह जम्मू-कश्मीर राज्य के विभिन्न दलों के 14 नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठक से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा भी करते दिखाई दे रहे हैं।

इसी के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं हैं। अच्छा काम ना करने पर कई मंत्रियों को हटाकर कई नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो मोदी सरकार के 30 मई 2019 से शुरू हुए दूसरे कार्यकाल के दौरान कैबिनेट में यह पहली फेरबदल होगी।

भाजपा के रामविलास पासवान और सुरेश अंगाड़ी के गुजरने के बाद से केंद्रीय मंत्री और राज्यमंत्री के पद खाली है। एनडीए से अलग होने के बाद शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल के मंत्रियों के भी पद अभी खाली हैं। अभी एक ही मंत्री के ऊपर कई विभागों की जिम्मेदारियां दी गई हैं।

उदाहरण के तौर पर, रेल मंत्री पीयूष गोयल के पास वाणिज्य और उद्योग और खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय है, वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्रामीण विकास के प्रबंधन का भी कार्यभार देख रहे हैं। अनुमान है कि इस साल वरुण गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पद सौंपा जा सकता है।

20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रियों, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अर्थव्यवस्था मंत्री निर्मला सीतारमन और रेल और वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शामिल थे, के साथ पीएम आवास पर एक उच्चस्तरीय मुलाकात हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में 30-35 फ़ीसदी चेहरों के बदलने की संभावना है जिसमें मौजूदा 21 मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है। स्वतंत्र प्रभार के नौ और 23 राज्य मंत्रियों के भी संख्या में इजाफे की बात हो रही है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों को देखते हुए वहां से आने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय भी सौंपे जा सकते हैं जिससे उनका सीधा जुड़ाव जनता से हो।