इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीएसई(CBSE), आईसीएसई(ICSE) और यूपी बोर्ड(UP Board) से स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूले जाने पर जवाब मांगा है। पांच दिन के अंदर सभी को अपने जवाब दाखिल करने हैं जिसे देखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 5 जुलाई तय की गई है।

मुरादाबाद के पेरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल एसोसिएशन की तरफ से एक याचिका दायर की गई थी। याचिका, शारीरिक कक्षाएं फिर से शुरू होने तक राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों में स्कूल फीस नियमन की मांग करते हुए, दाखिल की गई थी।

याचिका की सुनवाई करने के दौरान एसीजे, मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति,राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूलने पर नियंत्रण के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि उसने पहले ही यह आदेश जारी किया था कि स्कूल फीस के अतिरिक्त कोई भी अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।

स्टेट काउंसिल ने खंडपीठ को आगे बताया कि एक जारी सर्कुलर के मुताबिक शारीरिक कक्षाएं फिर से शुरू होने तक स्कूल फीस की वसूली करने की बात कहते हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि शहर के निजी स्कूलों के अत्यधिक शुल्क का भुगतान न करने के मामलों में ना तो बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं में जाने की अनुमति दी जा रही हैं, ना ही उन्हें परीक्षाओं में बैठने दिया जा रहा हैं और ना ही उच्च कक्षाओं में पदोन्नति हो रही हैं।

यहां तक कि कई मामलों में बच्चों के नाम भी स्कूलों में से काट दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने आगे बताया कि इस ‘ऑनलाइन पढ़ाई’ का पूरा वित्तीय बोझ माता-पिता के ऊपर डाला गया है जिसमें आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढांचे की स्थापना की लागत, महंगे इंटरनेट कनेक्शन, ज़्यादा बिजली बिल आदि शामिल है। इस मामले में राज्य ने भी व्यथित माता-पिता की सहायता के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।

यह सब देखते और सुनते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन सभी शिक्षा बोर्डों से जवाब तलब किया है। इसके अलावा खंडपीठ ने अब इस मामले को ‘आदर्श भूषण बनाम स्टेट ऑफ यूपी’ नामक एक समान जनहित याचिका के साथ टैग किया है। यह ऑनलाइन पढ़ाई कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों के बंद होने के बाद से जारी है।