लोजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद से पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान के बीच दूरी आ गई थी। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग पासवान के विरुद्ध जाकर नीतीश कुमार के पक्ष में बयान देकर पशुपति कुमार पारस ने इस बात को पक्का कर दिया था।

ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी की लड़ाई अब चुनाव आयोग में लंबित है। सांसद पशुपति कुमार पारस की तरफ से लोकसभा में खुद को संसदीय दल का नेता घोषित किए जाने के बाद भी चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक लोजपा चिराग पासवान के पास ही है।

जानकारी के अनुसार, कहे जा रहे पारस गुट की तरफ से लोजपा के चुनाव चिह्न पर कोई दावा नहीं किया गया है। यह चुनाव चिन्ह बंगला और झंडा है। ऐसे में चुनाव आयोग लोजपा पर बिना किसी दूसरे गुट का दावा किए बगैर उसका अधिकार नहीं मान रही है। पारस गुट की तरफ से किए गए फैसलों की जानकारी चुनाव आयोग को है लेकिन यह जानकारी किसी पार्टी पर अधिकार या दावे पर सुनवाई के लिए काफी नहीं मानी जा रही है।

दूसरी तरफ चिराग पासवान पहले ही चुनाव आयोग से मिलकर यह गुहार कर चुके हैं कि किसी तरफ से लोजपा पर कोई दावा किया जाता है तो उसे खारिज कर दिया जाए। ऐसे में अगर कोई फैसला करना भी है तो पहले उनका पक्ष सुना जाए।

पशुपति कुमार पारस द्वारा खुद को संसदीय दल का नेता व पार्टी का अध्यक्ष घोषित करने के बाद चिराग पासवान द्वारा लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पारस गुट की गतिविधियों को पार्टी विरोधी बताकर खारिज कर दिया गया है। इस तरह पूरी गेंद अभी चुनाव आयोग के पक्ष में मानी जा रही है।