5 जुलाई को शुरू होने वाले चिराग पासवान की “आशीर्वाद यात्रा” ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगा दिया है। सूत्रों के कहने अनुसार, भाजपा चिराग पासवान की इस यात्रा के बाद अपना रुख साफ करेगी कि वह किसके साथ है क्योंकि वह पहले यह देखना चाहती है कि बिहार की जनता चिराग पासवान को अपनाती है या नकारती है।

सूत्रों की जानकारी के मुताबिक मंत्रिमंडल के विस्तार का यह काम 20 जून तक होना था लेकिन अभी के लिए इसे टाल दिया गया है। अब यह काम जुलाई में किया जाएगा। इस यात्रा को लेकर चिराग और उनके समर्थकों ने पूरी ताकत लगा दी है क्योंकि उन्हें भी यह मालूम है कि उनका राजनीतिक भविष्य इसी यात्रा से तय होगा।

इधर भाजपा समेत बिहार के अन्य राजनीतिक दल भी यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि चिराग पासवान में उनके पिता रामविलास पासवान जैसी चमक है या नहीं। भाजपा बिहार में पासवान वोटरों का मूड जाने के लिए सर्वे भी करा रही है।

जानकारियों के मुताबिक पटना से हाजीपुर तक चिराग के स्वागत की शानदार तैयारियां की गई हैं। लोजपा के पूर्व विधायक राजकुमार साह की अध्यक्षता में मंगलवार को श्री कृष्णापुरी स्थित चिराग के आवास पर इस यात्रा को सफल बनाने की रणनीति पर काम किया गया।

लोजपा प्रवक्ता राजेश भट्ट ने दावा किया है कि चिराग के बिहार आगमन पर शानदार तैयारियों में पटना एयरपोर्ट से हाजीपुर तक जगह-जगह पर पांच तोरणद्वार एवं काफिले में पांच गाड़ियां शामिल हैं। यह आशीर्वाद यात्रा पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के जन्मदिन के अवसर पर निकाली जा रही है।

हाल ही में अपने गुजरात दौरे के दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के करीबी भाजपा नेता परिंदु भगत जो कि भाजपा में चुनाव और क्राइसिस मैनेजमेंट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, से मुलाकात और लंबी बातचीत की थी।

यह ज्ञात हो कि चिराग पासवान को हाल ही में उनके चाचा और हाजीपुर से एमपी,पशुपति कुमार पारस द्वारा पार्टी अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है।

लोजपा में टूट के बाद चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस, दोनों की चुनाव आयोग के समक्ष यह दलील है कि पार्टी उनकी है। अब यह फैसला चुनाव आयोग के पक्ष में है कि वह किसके हक में फैसला सुनाती है।