जनसंख्या कानून नियंत्रण को लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक नवाब इकबाल महमूद के बिगड़े बोल देखने को मिले। विवादित बयान में इकबाल महमूद ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि के लिए दलित और आदिवासी जिम्मेदार हैं ना कि मुस्लिम। उन्होंने आगे कहा कि दलित और आदिवासियों के पास ना तो कोई नौकरियां है ना ही कोई काम।

इसलिए वह सिर्फ बच्चे पैदा करने का काम करते हैं। उनका यह बयान उत्तर प्रदेश राज्य में जनसंख्या कानून नियंत्रण की व्यवहार्यता की जांच करने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का निर्णय लेने के बाद आया। इसे मुसलमानों के खिलाफ सरकार की साजिश बताते हुए इकबाल महमूद ने कहा कि, “ऐसा कोई भी कानून मुसलमानों के साथ धोखा होगा।” उन्होंने इसे सरकार की तरफ से सीधे-सीधे मुसलमानों के ऊपर किया जाने वाला हमला बताया।

सवाल रखते हुए उन्होंने यह पूछा कि, “अगर भाजपा को ऐसा लगता है कि जनसंख्या वृद्धि के लिए मुसलमान जिम्मेदार है तो इस कानून को संसद में पेश करके सिर्फ उत्तर प्रदेश की बजाय इसे पूरे देश के ऊपर क्यों नहीं लागू किया जाता ?” उन्होंने यह दावा किया कि मुस्लिम दो या तीन से अधिक बच्चे पैदा न करने की बात को अच्छे से समझते हैं।

इकबाल महमूद ने चेताते हुए इस कानून का हश्र एनआरसी की तरह होने की बात कही। दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि, “असम में लाए गए एनआरसी का ज्यादा प्रभाव मुसलमानों के बजाय गैर-मुसलमानों पर देखने को मिला। इस जनसंख्या नियंत्रण कानून का भी वही हश्र होगा।” उन्होंने कहा कि सरकार अगर यह जनसंख्या नियंत्रण कानून लाती है तो समाजवादी पार्टी इसका विरोध करेगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य की सरकार इस कानून को लेकर गंभीर दिख रही है। 2011 की जनगणना के हिसाब से उत्तर प्रदेश राज्य की जनसंख्या 20 करोड़ है। जनसंख्या की दृष्टि से यह देश का सबसे बड़ा राज्य है और विश्व की जनसंख्या की तुलना में उत्तर प्रदेश केवल तीन देशों से पीछे है। ऐसे में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य की सरकार जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना चाहती है।