राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने कानपुर प्रवास के दौरे में आज कानपुर देहात स्थित अपने गांव परौंख
पहुंचे। वहां पहुंचते हैं राष्ट्रपति ने अपने गांव की मिट्टी को नमन किया जिसे देख वहां मौजूद लोग भावुक
हो गए। यह तस्वीरें राष्ट्रपति भवन द्वारा साझा की गई। अपने कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति अपने गांव
पहुंच कर, वहां स्थित पथरी माता के मंदिर में गए और उसके बाद वहां मौजूद लोगों से भेंट की। राष्ट्रपति
रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल रहते हुए आखिरी बार 2017 में अपने पैतृक गांव आए थे।

कानपुर देहात के जन अभिनंदन समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने कभी सपने
में भी नहीं सोचा था कि उनकी तरह कोई आम युवा ऐसे किसी गांव से निकलकर देश की उच्च सेवा के
जिम्मेदारियों में भागीदार बनेगा। लेकिन हमारे लोकतांत्रिक प्रणाली ने इसे सच बनाया है। अपने बचपन
के दिन और साथियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अपने गांव वापस आकर वह बहुत खुश हुए।
उन्होंने कहा कि, “जहां आप है वही मैं भी हूं। मैं सिर्फ देश के पहले नागरिक के तौर पर जाना जाता हूं।”

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास दिखाते हुए उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, “पहले ऐसे किसी गांव
से निकलकर इतना आगे बढ़ना मुश्किल था पर अब ऐसा नहीं है। इसके जरिए सभी के लिए, चाहे उसके
जन्म की स्थिति कुछ भी हो, महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल करने के लिए रास्ते खुले हैं।” साथी किए
गए ट्वीट में अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने गांव और वहां के लोगों के द्वारा प्राप्त प्रेम और
सराहना को दिया। परौंख को एक गांव से बढ़कर उन्होंने अपनी मातृभूमि बताया। इसी मातृभूमि से प्राप्त
जज्बे को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से राज्यसभा, राज्यसभा से राजभवन, और राजभवन से
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का रास्ता बताया।

आज के अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति शहर और आसपास के जिलों के 52 लोगों से मिले। उनके
मुलाकात का दौर सुबह 11 बजे से शुरू हुआ। मिलने से पहले लोगों की कोरोना की जांच भी की गई।
सीएसजेएमयू के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक से मिलकर राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय का एलुमनाई
एसोसिएशन आईआईटी जैसा बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के उत्थान के
लिए जो भी महत्वपूर्ण विचार हैं उन्हें भेजे जाए, उस पर विचार किया जाएगा।

सीएसके के गोद लिए गांव शिवली के अनूपपुर में कुपोषण दूर करने के प्रयास और विभिन्न कार्यों की
उन्होंने सराहना की। इस बीच उन्होंने व्यापारियों की समस्याएं और वकीलों की रखी मांग भी सुनी।
राष्ट्रपति शाम के छह बजकर सात मिनट पर अपने दोस्त केके अग्रवाल से मिलने पहुंचे। करीब 1 घंटे 26
मिनट की इस मुलाकात में उन्होंने दोस्त का हालचाल जाना।

कोरोना महामारी के बीच हो रहे इस दौरे को देखते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि, “वैक्सीनेशन कवच के जैसे
कोरोनावायरस बचाव करती है।’ उन्होंने लोगों से वैक्सीन लेने की भी अपील की। राष्ट्रपति स्पेशल
फ्लाइट के जरिए 29 जून को नई दिल्ली वापस लौट आएंगे।