बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान को साथ आने का न्योता दिया है। ऐसे में उन्होंने लोजपा के टूट के मास्टरमाइंड के पता होने की भी बात कही और इससे सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। तेजस्वी ने कहा कि जब 2010 में लोजपा का कोई भी एमपी-एमएलए नहीं था तब नेता लालू यादव ने रामविलास पासवान को राज्यसभा का सांसद बनाया और इसके साथ ही चिराग पासवान को सही दिशा तय करने की भी बात कही।

जारी बयान में उन्होंने कहा कि अब यह “चिराग भाई के ऊपर है कि वह बंच ऑफ थॉट्स के पुर्जे के साथ रहना चाहते हैं या संविधान के अनुसार चलने वालों के साथ जुड़ना चाहते हैं।” इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए तेजस्वी यादव ने, सूत्रों के हिसाब से, चिराग पासवान के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को उनके जन्मदिन, 5 जुलाई ,पर श्रद्धांजलि देने का मन बना रहे हैं।

ज्ञात हो कि 5 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन इस बार उत्सव के पहले छोटे-से आयोजन में रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन बीते साल अक्टूबर के महीने में हुआ था।

चिराग पासवान ने बिहार में बीजेपी के गठबंधन को लेकर नसीहत दी है जिससे अगर बीजेपी चिराग पासवान की मदद नहीं करती है तो वह कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठा सकते हैं। अगर चिराग पासवान को अपने साथ लाने के कारणों को देखें तो सूत्रों के मुताबिक राजद 2024 और 2025 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुट चुकी है और इसमें एक बड़ी कोशिश बिहार के मुख्य नेता रहे रामविलास पासवान के उत्तराधिकारी को साथ लाने की है।

बता दें कि तेजस्वी यादव की मुख्य लड़ाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी जद(यू) से है जिसके लिए उन्हेें मुखर नीतीश विरोधियों की जरूरत है। चिराग पासवान ऐसे में नीतीश कुमार के एक मुखर विरोधी के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में राजद और नेता तेजस्वी यादव कि कोशिश रहेगी कि वह चिराग पासवान को अपने साथ शामिल कर सके।

साथ ही लोजपा अपने स्थापना काल के समय से ही मजबूत स्थिति में बनी हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव में भले ही लोजपा को एक सीट पर जीत मिली हो लेकिन पार्टी को करीब 25 लाख से अधिक वोट मिले थे। ऐसे में मुस्लिम-यादव और पासवान वोटों का समीकरण भी बनेगा और साथ ही युवा वोट भी एक बड़ा हिस्सा निभाएंगे क्योंकि चिराग पासवान और तेजस्वी यादव के साथ युवा वोटों की अच्छी-खासी संख्या जुड़ी हुई है जिसकी बदौलत राजद पिछले लोकसभा चुनाव में करीब 75 सीट लाने में कामयाब हुई थी।