प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जम्मू कश्मीर के नेताओं के साथ दिल्ली स्थित पीएम आवास पर मुलाकात की। 2019 में अनुच्छेद 370 के रद्द होने और स्पेशल स्टेटस हटने के बाद केंद्र सरकार और राज्य के नेताओं के बीच यह पहली अहम बातचीत थी। प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई इस बैठक को केंद्र की ओर से जम्मू-कश्मीर राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार प्रशासन में लोगों का विश्वास भरती है। ऐसे में माना जा रहा था कि बैठक के दौरान अनुच्छेद 370 के रद्द होने का मुद्दा छाया रहेगा लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक सभी कश्मीरी दलों ने जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग उठाई।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने ट्वीट के जरिए बताया कि “जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया तेज गति से पूरी होनी है ताकि वहां विधानसभा चुनाव कराए जा सके और एक निर्वाचित सरकार का गठन हो सके, जो प्रदेश के विकास को मजबूती दे।” ट्वीट में उन्होंने बताया कि “सरकार की प्राथमिकता इस केंद्र शासित प्रदेश में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।”  उन्होंने जोर देकर कहा कि डीडीसी चुनावों के सफल आयोजन की तरह ही विधानसभा चुनाव कराना सरकार की प्राथमिकता है।

बीजेपी लीडर निर्मल सिंह के अनुसार अनुच्छेद 370 के बाद उठने पर प्रधानमंत्री ने संविधान के क्षेत्र में रहकर काम करने की बात कही। बैठक के बाद पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता मुजफ्फर हुसैन बेग ने बताया कि प्रधानमंत्री का जोर परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव कराने की प्रक्रिया पर रहा। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा चुनाव कराने की मांग की।

उन्होंने कश्मीरी पंडितों की वापसी भी सुनिश्चित करने की मांग की। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री से अपील में कहा कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर विश्वास कायम करने की दिशा में काम किया जाए और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने बैठक में जम्मू-कश्मीर के लोगों की मुसीबतें सामने रखी।

बाद में उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कही क्योंकि यह उन्हें पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत की तरफ से मिला था। यह स्पेशल स्टेटस उनके पहचान, अवसर और जमीन की सुरक्षा के तौर पर दिया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी परिसीमन की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण चुनाव को जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की दिशा में प्रमुख मील का पत्थर माना। बैठक के बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा कि “बैठक बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। सभी ने संविधान और लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की।

हम जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास को लेकर कटिबद्ध हैं।” साथ ही उन्होंने इस अनुच्छेद के रद्द होने के बाद राज्य में हुए विकास का ब्योरा देते हुए बताया कि “90% केंद्र शासित स्कीम जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे हैं, नए मेडिकल कॉलेज भी राज्य में खोले गए हैं, और 28400 करोड़ की पॉलिसी के तहत 4.5 लाख रोजगार मुहैया कराने की कोशिश है।”

ज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर 2018 में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिरने के बाद से राष्ट्रपति शासन में है।