अप्रैल मई के महीने में देश की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन, बेड की उपलब्धता और कोरोना के रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयों में भारी कमी देखी गई थी। ज्ञात हो कि 20 अप्रैल, 2021 को 24 घंटे में दिल्ली के अंदर, कोरोना के 28,000 नए दर्ज किए गए थे। ऐसी स्थिति को मद्देनजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिल्ली को हर दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई करने का आदेश सुनाया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस जरूरत को करीब 900 मीट्रिक टन तक जाने की बात कही थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई ऑक्सीजन ऑडिट टीम की तरफ से नई रिपोर्ट में ये खुलासा किया गया है कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन सप्लाई की डिमांड को 25 अप्रैल से 10 मई के बीच तक करीब 4 गुना बड़ा कर पेश किया जिससे 12 अन्य राज्यों के सप्लाई डिमांड को दिक्कत आई। इन सभी राज्यों में भी कोरोना के मामले अधिक संख्या में पाए गए थे।

दिल्ली स्थित कुछ अस्पतालों द्वारा अप्रैल-मई में ऑक्सीजन के डिमांड के समय की गई बड़ी गलतियों के कारण दिल्ली सरकार ने 1140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मुहैया कराने की पेशकश की जिसमें सुधार के बाद यह पाया गया कि असल जरूरत सिर्फ़ 209 मीट्रिक टन की थी।

ऑडिट टीम की रिपोर्ट में यह बताया गया कि दिल्ली के 300 मीट्रिक टन की जरूरत को सरकार की तरफ़ से की 1200 मीट्रिक टन के रूप में पेश किया गया।

साथ ही पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) ने भी गठित टीम को यह बताया कि दिल्ली राज्य के पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई की उपलब्धता थी जिसके और मांग उठाने के कारण दूसरे राज्यों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कतें आई। इससे राष्ट्रीय संकट जैसे हालात पैदा हो सकते थे।