गुपकार संधि के नेताओं और प्रधानमंत्री के बीच हुई बातचीत को एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गुपकार संधि के मुख्य नेता डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने बताया था कि उन्हें प्रधानमंत्री की तरफ से बात करने का न्योता मिला जिसके लिए वे राज़ी है और अपनी बात प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने रखना चाहते हैं।

24 जून को हुई यह बातचीत पीएम आवास पर साढ़े तीन घंटे चली जिसमें जम्मू कश्मीर के आठ दलों के 14 नेताओं में 4 पूर्व मुख्यमंत्री भी थे और अधिकतर नेताओं ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा चुनाव करने की मांग उठाई। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, एन.एस.ए चीफ़ अजीत डोभाल और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहें।

बैठक के बाद सिलसिलेवार तरीके से ट्वीट करके प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता इस केंद्र शासित प्रदेश में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया तेज गति से पूरी होनी है,ताकि वह विधानसभा चुनाव कराए जा सकें और एक निर्वाचित सरकार का गठन हो जो प्रदेश के विकास को मजबूती दें।

बता दें कि गुपकार फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक संधि है जिससे जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस,जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, अवामी नेशनल कांफ्रेंस,पीपल्स मूवमेंट और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) जुड़े हुए हैं।

ज्ञात हो कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को खत्म करके राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। उसके बाद ज्यादातर बड़े नेता नजरबंद भी किए गए थे। लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं भी राज्य में एक तरह से ठप गई थी। प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई इस बैठक को केंद्र की ओर से वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

वर्ष 2020 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किए गए ट्वीट में गुपकार संधि को गुपकार “गैंग” कहा गया था जिसमें उन्होंने इसे वैश्विक महागठबंधन,लोगों के हित के खिलाफ कहा था और गैर-मुल्की ताकतों को जम्मू कश्मीर में दखल कराने का एक जरिया बताया था। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से इस संधि में कांग्रेस पार्टी के शामिल होने के रुख को साफ करने का भी सवाल उठाया था।