भारत बेशक पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से कोरोना संकट से दो चार हो रहा है लेकिन इस बीच राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप भी खूब हुए। कोरोना से निपटने की उम्मीद में जब वैक्सीन रूपी संजीवनी का ऐलान हुआ तो कई राजनीतिक दलों ने इसको लेकर खूब दुष्प्रचार किया। इसका असर ऐसा हुआ कि आज भी लोग कोरोना वैक्सीन लेने से कतरा रहे हैं और अधिकारियों के लिए वैक्सीन लगाना बड़ी चुनौती बन चुका है।

वैक्सीन को लेकर सपा नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी खूब बयानबाजी की थी। उन्होंने कोरोना वैक्सीन को भाजपा का टीका कहा था। हालांकि कल 7 जून को जब उनके पिता और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने वैक्सीन की पहली डोज ली तो लोगों ने अखिलेश के उस बयान की याद उन्हें बखूबी दिलाई। अब अखिलेश यादव के सुर भी बदले नजर आ रहे हैं। मुलायम के बाद अब अखिलेश भी टीका लगवाने को तैयार हैं।

अखिलेश ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा,’जनाक्रोश को देखते हुए आख़िरकार सरकार ने कोरोना के टीके के राजनीतिकरण की जगह ये घोषणा करी कि वो टीके लगवाएगी। हम भाजपा के टीके के ख़िलाफ़ थे पर ‘भारत सरकार’ के टीके का स्वागत करते हुए हम भी टीका लगवाएंगे व टीके की कमी से जो लोग लगवा नहीं सके थे उनसे भी लगवाने की अपील करते हैं।’ अखिलेश का यह बयान किसी यू-टर्न जैसा है लेकिन देर ही सही अखिलेश का यह फैसला उन लोगों के लिए एक सीख बनेगा जो उनके बयान के बाद वैक्सीन लेने को तैयार नही थे।