किसान आंदोलन लगातार जारी है। हर दिन एक नई आशा दिखती है कि शायद किसानों और सरकार के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकल आये। हालांकि ऐसा अभी तक ऐसा हो नही सका है। एक तरफ किसान जहां अपनी मांग पर अड़े हैं वहीं सरकार बिल को निरस्त करने की जगह बीच का रास्ता निकालने पर अड़ी है। इसी क्रम में सरकार और किसानों की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बातें रखने का भी दौर जारी है।


एक तरफ आज किसानों ने जहां सिंघु बॉर्डर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की वहीं दूसरी तरफ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अब तक हुई बातचीत पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए किसानों से मार्मिक अपील की है। जानें बड़ी बातें-

हम लोगों को लगता था कि कानूनी प्लेटफॉर्म का फायदा लोग अच्छे से उठाएंगे। किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित होगा। नई तकनीक से जुड़ेगा। बुआई के समय ही उसको मुल्य की गारंटी मिल जाएगी।
उनकी पहली मांग कानून निरस्त करने की थी। सरकार का पक्ष है कि कानून के वो प्रावधान जिनपर किसानों को आपत्ति है उन प्रावधानों पर सरकार खुले मन से बातचीत करने के लिए तैयार है। सरकार की कोई इगो नहीं है और सरकार को उनके साथ बैठकर चर्चा करने में कोई दिक्कत नहीं है।

बातचीत में ये बात आती थी कि ये कानून वैध नहीं है क्योंकि कुछ लोगों ने बता रखा था कि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार इस पर कानून नहीं बना सकती है।

कई बार ये कहा गया कि किसानों की भूमि पर बड़े उद्योगपति कब्ज़ा कर लेंगे। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पहले से ही देश के कई राज्यों में होती रही है। इस कानून के अंतर्गत एग्रीमेंट प्रोसेसर और किसान की फसल बीच ही होगा,किसान की भूमि से संबंधित कोई करार इसमें नहीं हो सकता है।

मैंने सबको आश्वस्त किया है कि MSP चलती रहेगी। इस पर कोई खतरा नहीं है। MSP पर रबी और खरीफ फसल की खरीद इस साल बहुत अच्छे से हुई। इस बार रबी की फसल का बुआई के समय ही MSP घोषित कर दिया गया। मोदी जी के नेतृत्व में MSP को डेढ़ गुना कर दिया गया है।

उनको ऐसा लगता है कि बिजली का कोई एक्ट आ रहा है जो किसानों के लिए थोड़ी तकलीफ पैदा करेगा। राज्य सरकारें बिजली वितरण कंपनियों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही, सब्सिडी की राशि हस्तांतरित करने की व्यवस्था संशोधन विधेयक में भी रहेगी। जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा।

हम लोगों ने उनको एक पूरा प्रपोजल बनाकर कल दिया था। उनके सारे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद भी अंत में वे लोग किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं इसका मेरे मन में बहुत कष्ट है।

किसान बहनों और भाईयों से आग्रह करता हूं कि आप सबने चर्चा के दौरान जो प्रश्न उठाए थे उनका समाधान करने के लिए लिखित प्रस्ताव भारत सरकार ने आपके पास भेजा है। आप उन पर विचार करें और आपकी तरफ से जब भी चर्चा के लिए कहा जाएगा भारत सरकार एकदम चर्चा के लिए तैयार है।