कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकार के बीच शनिवार को विज्ञान भवन में हुई पांचवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही और किसानों का प्रदर्शन लगातार 11वें दिन रविवार (6 दिसंबर) को भी जारी है. पांचवे दौर की बातचीत में भी किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे और अब दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की बातचीत 9 दिसंबर को होगी

इस बीच किसान संगठनों ने सोमवार 8 दिसंबर को देशभर में बंद का आह्वान किया है. बंद के दिन किसान संगठनों के कार्यकर्ता कई शहरों में चक्का जाम कर सकते हैं. किसानों के इस बंद को राजनीतिक पार्टियों से भी समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने किसानों के बंद का समर्थन करने का फैसला किया है.

कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कांग्रेस पर किसान आंदोलन में किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है. कृषि राज्य मंत्री ने कहा, ‘सरकार कृषि कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है. लेकिन हम कृषि कानूनों को वापस नहीं लेंगे. देशभर में MSP जारी रहेगी’.

कैलाश चौधरी ने आगे कहा कि कांग्रेस ने 60 साल तक राज किया लेकिन कृषि के लिए उनका बजट क्या था. मोदी सरकार ने किसानों के हित में काम किया है. पीएम मोदी की सरकार ने किसान सम्मान निधि को शुरू किया. मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है.

वहीं NDA के सहयोगी दल JDU के नेता के. सी. त्यागी ने कहा कि वो कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के बयान से पूरी तरह से असहमत हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी का तो उत्तर भारत में अस्तित्व ही नहीं बचा है. कांग्रेस के भड़काने से किसान उनके झांसे में आने वाले नहीं हैं

उन्होंने आगे कहा कि ये किसानों का स्वतः स्फूर्त आंदोलन है, जिसमें कई तरह की गलतफहमियां शामिल हैं. सरकार को इस गलतफहमी को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए. ये सरकार का दायित्व है कि वो किसानों से बातचीत करके समाधान निकाले.

के. सी. त्यागी ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी 1 दर्जन बार अलग-अलग राज्यों में धरने प्रदर्शन कर चुकी है और अभी तक वो एक भी जिले को बंद करने में सफल नहीं हुई है. ऐसे में हम कैसे मान लें कि किसानों में उनकी पैठ है. अगर कांग्रेस ऐसा समझती है तो ये कांग्रेस की मूर्खता होगी. मुझे लगता है कि 9 दिसंबर को एक बीच का रास्ता निकलेगा.