केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज 9 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रधान सचिवों/अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ बातचीत की। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा और केरल शामिल थे।

सुश्री के. के. शैलजा, स्वास्थ्य मंत्री (केरल), श्री पीयूष हजारिका, स्वास्थ्य मंत्री (असम), श्री बलबीर सिंह सिद्धू, स्वास्थ्य मंत्री (पंजाब), श्री इटेला राजेंद्र, स्वास्थ्य मंत्री (तेलंगाना), श्री राजीव सैजल, स्वास्थ्य मंत्री (हिमाचल प्रदेश) अपने–अपने राज्यों की ओर से इस बैठक में शामिल हुए।

इन राज्यों/इन राज्यों के कुछ जिलों में मामलों की संख्या में वृद्धि, सात दिनों के औसत के लिहाज से दैनिक मामलों के उच्च औसत, जांच में गिरावट, अस्पताल में भर्ती होने के पहले 24/48/72 घंटों के भीतर मृत्यु की उच्च दर, मामलों के दोगुने होने की उच्च दर, आबादी के कमजोर तबकों के बीच अपेक्षाकृत अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।

डॉ. हर्षवर्धन ने सभी को इस बात की याद दिलाते हुए अपनी बात की शुरुआत की कि 8  जनवरी को कोविड के बारे में पहली बैठक होने के बाद देश ने इस महामारी के 11वें महीने में कदम रखा है।

आने वाले सर्दी और त्योहारों के लंबे मौसम में इस बीमारी के बढ़ने के जोखिमों,  जोकि कोविड-19 के खिलाफ अब तक सामूहिक रूप से हासिल की गई बढ़त को खतरे में डाल सकते हैं, से जुड़ी चिंताओं को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “हम सभी को दशहरे के साथ शुरू होने वाले त्योहारों के संपूर्ण मौसम के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है और यह सतर्कता दिवाली, छठ पूजा, क्रिसमस और फिर अगले साल मकर संक्रांति पर भी जारी रहेगी। श्वांस संबंधी वायरस भी सर्दियों के महीनों में तेजी से फैलता है।”

कोविड के दौरान देश की यात्रा को साझा करते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे देश ने प्रयोगशालाओं की संख्या, जोकि जनवरी में एनआईवी, पुणे में एक, से बढ़ाकर आज 2074 कर दी। इसकी वजह से जांच करने की क्षमता प्रति दिन 1.5 मिलियन की हो गई।

उन्होंने कोविड की देखभाल से जुड़े पदानुक्रम के प्रत्येक स्तर पर सामान्य, ऑक्सीजन युक्त और आईसीयू बिस्तरों की बढ़ती संख्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने सभी को सूचित किया कि कुल सक्रिय मामलों में, मात्र 0.44% वेंटिलेटर की सहायता पर हैं,  2.47% आईसीयू में हैं और महज 4.13% ऑक्सीजन समर्थित बेड पर हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत में ठीक होने की दर सबसे अधिक है और वह इस बीमारी से होने वाली सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में से एक है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई बातचीत के बारे में श्रोताओं को जानकारी देते हुए उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि इस बीमारी के प्रसार की निगरानी प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से की जा रही है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कई बार कोविड के विभिन्न मुद्दों पर देश को संबोधित किया है। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रमुखों के साथ गहन चर्चा की। उनका हालिया संबोधन भले ही सिर्फ दस मिनट का था, लेकिन वह कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार के निरंतर पालन और इसे एक जन आंदोलन में बदलने का महत्वपूर्ण संदेश था।” 

उन्होंने इस जन आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों जैसे कि कॉलर ट्यून और अन्य आईईसी गतिविधियों के माध्यम से संदेशों के प्रसार के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने यह कहकर अपनी बात समाप्त की कि कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार अभी भी कोविड के खिलाफ सबसे अच्छा उपाय है और इसका अनुसरण करना आसान है।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ. सुजीत के सिंह ने कोविड ​​के संचरण संबंधी प्रसार और विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी प्रयासों/उपायों के बारे में सभी को अवगत कराया। उन्होंने लगातार चिंता वाले मुद्दों और क्षेत्रों/जिलों के बारे में भी प्रकाश डाला।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों ने कोविड के पॉजिटिव मामलों के नियंत्रण, निगरानी और उपचार के लिए की गई कार्रवाइयों का एक संक्षिप्त स्नैपशॉट साझा किया। उन्होंने पालन किये जा रहे सर्वोत्तम उपायों पर भी प्रकाश डाला।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री राजेश भूषण ने सभी राज्यों से अनुरोध किया कि वे कोविड को नियंत्रित करने के लिए दस प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें और इसके प्रसार के ऊपर अपनी बढ़त हासिल करें: जांच बढ़ाना; बाजार-स्थानों, कार्यस्थलों, धार्मिक सभाओं, जोकि इस बीमारी के तेज प्रसारक बनने की क्षमता रखते हैं, में लक्षित जांच; जांच में आरटी-पीसीआर की हिस्सेदारी बढ़ाना; रोगसूचक आरएटी निगेटिव लोगों की अनिवार्य जांच; पहले 72 घंटों के भीतर संपर्क का पता लगाने का काम पूरा करना; प्रति नए मामलों में औसतन 10-15 संपर्कों का पता लगाना;  

अस्पताल में भर्ती होने के पहले 24-72 घंटों के भीतर मृत्यु के प्रतिशत को रोकने के लिए स्वास्थ्य सुधार के लिए जरूरी व्यवहारों को बढ़ावा देना; मृत्यु दर को 1% से नीचे लाने के लिए, यदि आवश्यक हो, हर दिन अस्पतालवार मृत्यु का विश्लेषण और हस्तक्षेप; 60 वर्ष से ऊपर के लोगों और सह-रुग्णताओं वाले कमजोर समूहों का संरक्षण; व्यवहार परिवर्तन अभियान के माध्यम से कोविड ​​उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देना जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, शहरी स्थानीय निकाय, सांसद, विधायक और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली हस्ती लोगों से कोविड संबंधी ​​उपयुक्त व्यवहार का पालन करने की अपील करें।

श्रीमती आरती आहूजा, अतिरिक्त सचिव (स्वास्थ्य), श्री लव अग्रवाल, संयुक्त सचिव (स्वास्थ्य) और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।