2015 में फेल हुए एग्जिट पोल 2020 में कितने सही साबित होंगे?

बिहार विधानसभा का चुनावी समर आज अंतिम चरण के मतदान के साथ ही खत्म हो गया। अब अगले तीन दिन सभी के लिए बेचैनी भरे हैं। महीनों चली चुनावी प्रक्रिया और लगातार, धुंआधार रैलियों की भागमभाग बेशक बंद हो गई है लेकिन मतदाताओं ने इस बार किसको पटना की गद्दी सौंपी है यह सोच सभी दलों और नेताओं की परेशानियां बढ़ी हुई हैं। इन सब के बीच टीवी चैनलों के एग्जिट पोल ने इस बेचैनी को और बढ़ा दिया है।

2020 के बिहार विधानसभा के अंतिम चरण के मतदान के बाद आये सर्वे जहां एनडीए के खेमे में सस्पेंस और परेशानी बढ़ा गये वहीं पहले से रैलियों में भीड़ देख उत्साहित तेजस्वी को और राहत दे गए। कुल मिलाकर इस बार के सर्वे को समझें तो यह बात स्पष्ट है कि तेजस्वी काफी आगे हैं। बीजेपी भी मजबूत स्थिति में है लेकिन सीएम नीतीश इस बार एनडीए के लिए कमजोर कड़ी साबित होते नजर आ रहे हैं। हालांकि एग्जिट पोल के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए अभी से अंदाजा लगाना किसी को भी रास नही आ रहा और सब 10 नवम्बर तक इंतजार करना चाहते हैं।

अब 2015 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो टुडेज-चाणक्य ने NDA को 155 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की थी और महागठबंधन के खाते में 83 सीटें दिखाई थीं। इंडिया टुडे ग्रुप और सिसेरो के एग्ज‍िट पोल में NDA को 113-127 सीटें दी गई थीं तो महागठबंधन को 111-123 सीटें मिलने की बात कही थी।

सी-वोटर ने महागठबंधन को 112 से 132 सीटें मिलने का अनुमान जारि किया था। हालांकि, एनडीए को भी 101 से 121 मिलने की भविष्यवाणी की थी। नील्सन ने महागठबंधन को 130 सीटें दी थीं, जबकि NDA के लिए 108 सीटों का अनुमान लगाया गया था। हालांकि तब महागठबंधन(जदयू-राजद-कांग्रेस) को 178 सीटें मिली थी और एनडीए(बीजेपी-लोजपा-रालोसपा-हम) महज 58 सीटों पर सिमट गई थी। इसके अलावा 7 सीटें अन्य के खाते में थीं।

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