रिपब्लिक टीवी के चीफ एडिटर अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने का मुद्दा अब पूरी तरह से राजनितिक रंग ले चुका है. इस मसले को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार एक दूसरे के आमने-सामने खड़ी नज़र आ रही है. केंद्र सरकार इस मामले को जहां तानाशाही रवैया बता रही है वहीँ महाराष्ट्र सरकार का कहना है की कानून अपना काम कर रहा है.

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अर्नब की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की महाराष्ट्र सरकार सत्ता का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग करने में लगी है. वह प्रेस की आज़ादी को दबाना चाहती है. अर्नब की गिरफ्तारी लोकतंत्र के चौथे खम्भे पर हमला है.

अमित शाह ने तो अर्नब की गिरफ्तारी की तुलना आपातकाल से कर डाली. उन्होंने कहा की यह घटना आपातकाल की याद दिलाती है.प्रेस की आजादी पर इस हमले का विरोध जरूर होना चाहिए और विरोध किया जाएगा.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी अर्नब की गिरफ्तारी की निंदा की है. इन्होने कहा की यह प्रेस की आज़ादी पर चोट है. महाराष्ट्र सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाना चाहती है. यह सब सोनिया और राहुल गाँधी के निर्देशों पर हुआ है. यह बेहद शर्मनाक है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इस घटना को प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया. उन्होंने भी कहा की यह घटना आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है. जावड़ेकर ने कहा की प्रेस के साथ इस तरह का बर्ताव ठीक नहीं है.

वहीँ केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस घटना को फासीवाद का नाम दे डाला. उन्होंने कहा की महाराष्ट्र सरकार को जो पसंद नहीं आता है वह उसे कुचलने का काम करती है. उन्होंने लोगों से कहा की इस मसले पर अगर आप चुप रहे तो अगला नंबर आपका भी हो सकता है.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इस घटना के लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा की अर्नब की गिरफ्तारी के पीछे कांग्रेस का हाथ है क्यूंकि अर्नब लगातार इस बात का खुलासा कर रहे थे की कैसे कांग्रेस साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने वालों का साथ दे रही है.

उन्होंने कहा ‘और उसी कांग्रेस पार्टी की इशारों पर नाचने वाली कमजोर सरकार, महाराष्ट्र को आपातकाल की ओर ले जा रही है. प्रेस की आजादी की बात करने वाले अब कहां छिप कर बैठे हैं? आज सारे दोगले चेहरे उजागर हो रहे हैं.

वहीँ शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के मामले में महाराष्ट्र सरकार के बचाव में सामने आये है. उन्होंने अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के पीछे कहीं भी बदले की भावना नहीं यही. राज्य सरकार का इस गिरफ्तारी से कोई लेना-देना ही नहीं है. कानून को अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कुछ सबूत मिले थे इसलिए पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया. कानून तो बस अपना काम कर रहा है.

दूसरी ओर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया भी अर्नब गोस्वामी के समर्थन में उतर आयी है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बयान जारी कर खा है की जिस तरह से अर्नब को गिरफ्तार किया गया है वह निंदनीय है. इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

आपको बतादें की सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी के घर पहुंची थी और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया था. अर्नब गोस्वामी ने बताया था की गिरफ़्तारी के दौरान पुलिस ने उनसे मारपीट भी की थी. 

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