फ्रांस की एक पत्रिका में छपे एक कार्टून का मामला ऐसा गरमाया कि आज फ्रांस में न सिर्फ हत्याओं के एक दौर शुरू होता नजर आ रहा बल्कि दुनिया के देश अलग-अलग बंटते नजर आ रहे हैं। फ्रांस जहां इस्लामिक आतंकवाद पर सख्ती से निपटने की तैयारी में है वहीं दुनिया के इस्लामिक देश फ्रांस के खिलाफ और कट्टरवाद के समर्थन में खुल कर खड़े होते नजर आ रहे हैं।

एक तरफ फ्रांस को जहां भारत, यूरोपीय यूनियन (27 देश), अमेरिका जैसे कई देश जहां फ्रांस के समर्थन और आतंकवाद के विरोध में डंटकर खड़े हैं वहीं आतंक का आक पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया फ्रांस में हुई हिंसा को सही ठहराने पर आमादा है। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या धर्म के नाम पर हिंसा को किसी भी तरीके के कुतर्क से सही ठहराया जा सकता है?

फ्रांस में हुई हिंसा और उसके बाद कार्रवाई से भड़के मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने ऐसा भड़काऊ ट्वीट किया कि ट्विटर को उनका यह ट्वीट डिलीट करना पड़ा। हालांकि वह फिर भी नही रुके और लगातार फ्रांस के खिलाफ आग उगलते नजर आ रहे हैं। वहीं तुर्की और पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों ने भी भड़काऊ बयान देकर फ्रांस के विरोध और इस्लाम का समर्थन किया है।