उत्तरप्रदेश के राजनीति के दो परस्पर विरोधी जब साथ मिले थे तो सभी को यह आश्चर्य हुआ था कि ऐसा कैसे हुआ और क्यों हुआ। खैर यह गठबंधन फ्लॉप रहा और यूपी में बीजेपी की सरकार बन गई।

इसके बाद तामझाम के साथ बने इस गठबंधन में भी दरार बढ़ती गई और अब यह दरार खाई में बदलती दिख रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं मायावती की अगुवाई वाली बसपा और अखिलेश की अगुवाई वाली सपा के बीच हुए गठबंधन की।


यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अब बसपा प्रमुख मायावती ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे बड़ी गलती बताया है।मायावती ने कहा,’इस बार लोकसभा चुनाव में NDA को सत्ता में आने से रोकने के लिए हमारी पार्टी ने सपा सरकार में मेरी हत्या करने के षड्यंत्र की घटना को भूलाते हुए देश में संकीर्ण ताकतों को कमजोर करने के लिए सपा के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़ा था।’


मायावती ने आगे कहा,’सपा के मुखिया गठबंधन होने के पहले दिन से ही एससी मिश्रा जी को ये कहते रहे कि अब तो गठबंधन हो गया है तो बहनजी को 2 जून के मामले को भूला कर केस वापस ले लेना चाहिए, चुनाव के दौरान ​केस वापस लेना पड़ा।’


मायावती ने केस वापस लेने को गलती बताते हुए कहा,’चुनाव का नतीजा आने के बाद इनका जो रवैया हमारी पार्टी ने देखा है, उससे हमें ये ही लगा कि केस को वापस लेकर बहुत बड़ी गलती करी और इनके साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था।’


सपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा,’इनका एक और दलित विरोधी चेहरा हमें कल राज्यसभा के पर्चों के जांच के दौरान देखने को मिला। जिसमें सफल न होने पर ये ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की तरह पार्टी जबरदस्ती बीएसपी पर बीजेपी के साथ सांठगांठ करके चुनाव लड़ने का गलत आरोप लगा रही है।’

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