उत्तर प्रदेश सरकार पंडालों में आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा पर रोक का आदेश वापस ले। यह आदेश कानून सम्मत नहीं है। उन्होंने कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो करोड़ों लोगों की आस्था पर चोट पहुंचेगी। इसे लेकर अनिष्ट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में लाखों स्थानों पर आदि शक्ति मां दुर्गा के भक्त पंडाल लगाकर और मन्दिरों को सजाकर विधिवत पूजा करते हैं। इन पंडालों और मन्दिरों में करोड़ों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार का पंडालों में पूजा पर रोक का आदेश इन भक्तों की आस्था पर हमला है। ताकत के बल पर इस आस्था पर हमला हुआ तो भक्तों के हृदय से आह निकलेगी जिसके बारे में मान्यता है कि आह से लोहा भी भस्म हो जाता है।

जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार ने भगवान राम की रामलीला के लिए सामाजिक दूरी और सौ की संख्या की शर्त के साथ भक्तों को इक्कठा होकर दर्शन और पूजा की छूट दिया है, उसी प्रकार से सरकार आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा के मामले में भी समाजिक दूरी और सौ की संख्या की शर्त के साथ सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल लगाकर और पहले से स्थापित मन्दिरों में साज सज्जा करके पूजा और दर्शन करने की छूट दे।

जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए उदारता दिखाती है, उसी तरह की उदारता आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा के लिए सड़कों पर पंडाल लगाने, उसमें मूर्ति स्थापना कर पूजा दर्शन के मामले में भी दिखाए।

उपर्युक्त बातें यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कही हैं। उन्होंने सरकार से दुर्गा पूजा की अनुमति देने और यथाउचित व्यवस्था की मांग भी दोहराई है। अब देखना है यूपी सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है।