सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ा नाम है. भारत में तो उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है. मगर आजकल लोग इस भगवान से नाराज़ चल रहे है. जी हाँ, आपने सही सुना. कन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) आजकल सचिन का जमकर विरोध कर रही है. उनका कहना है की सचिन को रूपए और देश में से चुनना पड़ेगा की उन्हें क्या चाहिए. तो आइये आपको बताते है की ऐसी नौबत आयी ही क्यों।

हाल ही में पेटीएम फर्स्ट गेम्स ने सचिन तेंदुलकर को अपना ब्रांड अम्बेस्डर नियुक्त किया है. सचिन तेंदुलकर के इसी फैसले पर कैट ने नाराज़गी जताई है. कैट का कहना है की पेटीएम में चीनी कंपनी अलीबाबा का पैसा लगा है इसलिए सचिन को इस कंपनी के साथ कोई ताल्लुकात नहीं रखने चाहिए. कैट के राष्‍ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा की हम सचिन का बहुत सम्मान करते है और हमने उन्हें पत्र लिखकर अपने फैसले पर फिरसे विचार करने को कहा है. सचिन पूरे देश के रोल मॉडल है. चीन जिस तरह हमारे देश को नुक्सान पहुंचेंगे की कोशिश कर रहा है, उसको देखने हुए सचिन तेंदुलकर को इस कंपनी से किसी भी तरह को कोई नाता नहीं रखना चाहिए.

उन्होंने ये भी कहा की किसी भी चीनी कंपनी के साथ जुड़ना हमारी सेना और जवानों का अपनमान है. खुद सचिन को भी एयर फाॅर्स में ग्रुप कमांडर की उपाधि से नवाज़ा गया है. आपको बतादें की कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में बढ़ते फंतासी खेलों अन्य ऑनलाइन गेमिंग कार्यक्रमों में 300 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है. पेटीएम ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा की सचिन तेंदुलकर भारत में बच्चा बच्चा भी जानता है. वह देश में रोमांचक फंतासी खेलों के बारे में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

आपको बतादें की हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर में इस बात का दावा किया गया था की चीन ऐप्स के भारत के लोगों की जासूसी करवा रहा है. इन्ही आरोपों के चलते भारत सरकार 150 से अधिक ऐप्स बैन कर चुकी यही.