एक कहावत है कि दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। खास कर राजनीति में कुछ भी असंभव नही है। हाल में महाराष्ट्र से जुड़ी घटनाओं को देखें तो यह बात और साफ समझ आ सकती हैं। इसके दो किरदार हैं पहली कंगना रनौत जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत केस में सत्ता से लेकर शिवसेना और बॉलीवुड माफिया से लेकर ड्रग्स माफिया तक सबके खिलाफ आवाज़ बुलंद की। लिहाज संजय राउत भीड़ गए और बीएमसी ने कार्रवाई भी कर दी। संजय से भिड़ने और मुम्बई न आने की बातों के बीच पहले हिमाचल सरकार ने उन्हें सुरक्षा दी और बाद में गृह मंत्रालय ने वाई केटेगरी की सुरक्षा दे दी।


अब दूसरे किरदार की बात करते हैं। दूसरे किरदार हैं नेवी से रिटायर ऑफिसर मदन मोहन शर्मा। मदन मोहन शर्मा ने उद्धव ठाकरे का एक कार्टून सोशल मीडिया पर शेयर किया जिसके बाद शिवसैनिकों ने उनकी पिटाई कर दी थी। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था। अब आ रही खबर के मुताबिक उन्होंने बीजेपी-आरएसएस से जुड़ने का फैसला किया है। इन दोनों किरदारों में एक दो बातें और कॉमन है वह यह कि दोनों ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बयानबाजी की, दूसरी दोनो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिल चुके हैं और तीसरी दोनो को बीजेपी की तरफ से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सपोर्ट मिलता रहा है।


मदन शर्मा ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि वह बीजेपी-आरएसएस से जुड़ गए हैं। हम कोई गुंडागर्दी नही होने देंगे। वहीं, मदन शर्मा की पिटाई के मामले में वयोवृद्ध संगठन राष्ट्रीय सैनिक संस्थान की मुंबई इकाई के अध्यक्ष पंजाबराव लक्ष्मण मुधाने ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे माफी नहीं मांगते हैं, तो 3 दिन में सभी रिटायर आर्मी अफसर आजाद मैदान में इकट्ठा होंगे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।