भारत सहित दुनिया भर में कोरोना का कहर जारी है। हर दिन संक्रमण और मृतकों के आंकड़े एक नए रिकॉर्ड को छू रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि संक्रमण के मामले में भारत अब दुनिया मे अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आ पहुंचा है। इन सभी ख़बरों के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आई थी जो कोरोना से इस लड़ाई में उस दीपक की तरह थी जिससे बहुत उम्मीदें थी।


अब वक्त बदले हैं, हालात बदल गए हैं और एक वक्त में 800 केस तक के आंकड़े पर पहुंच चुकी दिल्ली में अब प्रतिदिन संक्रमण के आंकड़े एक बार फिर तेजी से बढ़ते हुए 4000 तक जा पहुंचे हैं। इसके पीछे कारण क्या है? पहला और सबसे बड़ा कारण है आम जनता की लापरवाही। दूसरा कारण है लॉकडाउन के दौरान हो लोग गांव या दूसरे प्रदेशों में वापस गए थे वह अब लौटने लगे हैं। तीसरा है बाज़ार खुलना, सार्वजनिक परिवहन का शुरू होना और ऑफिस का खुलना।


चौथे कारण की बात करें तो अन्य राज्यों से आने वाले लोग रेलवे और राज्यों की अडवाइजरी की धज्जियां खुलेआम उड़ा रहे हैं। न प्रशासन का वश है न कोई सख्ती न कोई देखने पूछने वाला। ऐसे में कोरोना से लड़ाई में दिल्ली पिछड़ने लगी। यह सारे कारण आंखों देखी हैं। कही-सुनी नही।

इनपर विस्तृत चर्चा से पहले दिल्ली मेट्रो और डीटीसी को बधाई। इस कोरोना काल मे जिस तरह के इंतजाम मेट्रो से लेकर बस स्टैंड पर किये गए हैं और सीमित संख्या में यात्रियों के साथ परिवहन किया जा रहा वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।


दिल्ली मेट्रो की बात करें तो स्टेशन एंट्री से पहले टेम्परेचर चेक होना, दूसरे कदम पर समान का सैनिटाइज होना और इसके आगे ऑटोमैटिक हैंड सैनिटाइजर मशीनों की उपलब्धता, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का कड़ाई से पालन कराने सहित अन्य कोरोना प्रोटोकाल के पालन में दिल्ली मेट्रो अव्वल है। वहीं डीटीसी की बसें भी इस मामले में शानदार हैं। हालांकि बाजार में बिना मास्क भीड़ में घूमते लोग, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होना कोरोना से लड़ाई को पलीता लगा रहे हैं। पुलिस हर किसी पसर नजर नही रख सकती। सायरन सुन कर मास्क पहनने वालों को न तो अपनी चिंता है न दुसरों की वह बस चालान के डर से मास्क का उपयोग कर रहे।


उम्मीद है आने वाले दिनों में लोग सुधरेंगे या सरकार कुछ और कड़े कदम उठाएगी ताकि कोरोना से लड़ाई में कई राज्यों के लिए प्रेरणा बनने वाली दिल्ली एक बार फिर इससे सही तरीके से निपट सके।