उत्तरप्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ को अब तक का सबसे बेहतरीन सीएम माना जाता है। सबूत के तौर पर इस बाबत कई सरकारी, गैर सरकारी सर्वे अलग-अलग माध्यमों से उपलब्ध हैं। योगी के आने के बाद से विपक्ष लगभग यूपी में तटस्थ था। सपा बसपा को कोई ऐसा मौका विरले ही मिला जब योगी पर सवाल खड़े कर सकें लेकिन अब अचानक यूपी का माहौल बदल रहा है।


यह माहौल राम मंदिर के निर्माण, इज ऑफ डूइंग बिज़नेस या योगी की छवि या विपक्ष की घेरेबंदी से नही बल्कि यूपी की राजनीति में नई आम आदमी पार्टी की एंट्री से बदलता नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी की तरफ से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ऐसे एक्टिव हुए की योगी को विधानसभा में बिना नाम लिए बयान तक देना पड़ा। ठाकुर-ब्राह्मण मामले में एफआईआर दर्ज करनी पड़ी और अब लखीमपुर खीरी जाने के बाद संजय को रोकने पर विवश होना पड़ा।


आगे बात बढ़ाने से पहले आपको बता दें कि वाकई में आज हुआ क्या? दरअसल यूपी के लखीमपुर खीरी में तीन बार विधायक रहे निर्वेन्द्र मिश्रा की रविवार को दबंगों ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी। इसी सिलसिले में संजय सिंह सोमवार को उनके परिजनों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान ने यूपी पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। इसकी जानकारी आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट के माध्यम से दी थी।


अब इन घटनाक्रमों और पिछले दिनों उनके योगी के खिलाफ मुखर होने की घटना को यूपी की राजनीति में आप की एंट्री और वहां की राजनीति मे संजय सिंह को बड़े चेहरे के रूप देखा जाने लगा है। कहीं न कहीं बीजेपी को भी आप की एंट्री से बेचैनी महसूस हुई है। यही वजह है कि खुद सीएम बौखलाहट में उन्हें ‘दिल्ली का नमूना’ कह चुके हैं। संजय के बयानों से कई बार सत्ताधारी बीजेपी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यह तय है कि सपा-बसपा सहित बीजेपी और योगी की डगर संजय सिंह और आम आदमी पार्टी मुश्किल करेगी।