बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब दल और नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं। समीकरण साधने के लिए क्या दुश्मन क्या दोस्त सब जायज है। कहीं रूठे यारों को मनाने का क्रम जारी है तो कहीं पाला बदल सुरक्षित हो जाने की जद्दोजहद है वहीं हमेशा की तरह सत्ता पक्ष के तरकश में शिलान्यास, उद्घाटन के साथ हर वर्ग को लुभाने के लिए कुछ न कुछ वादे हैं।


राजनीति में जो हो वह कम और जायज है। इसी क्रम में बिहार सरकार ने दलितों को लुभाने के लिए एक नई घोषणा की है। इस घोषणा के मुताबिक अगर राज्य में किसी अनुसूचित जाति/ जनजाति के व्यक्ति की हत्या होती है तो उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। नीतीश कुमार शुक्रवार को पटना में अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।


नीतीश का यह ऐलान चुनावी है। इसके पीछे कारण है एनडीए में शामिल लोजपा का लगातार नीतीश कुमार और जदयू पर निशाना साधना। नीतीश यह अच्छी तरह जानते हैं कि अगर चिराग ने विरोध जारी रखा और जदयू उम्मीदवारों के खिलाफ लोजपा ने उम्मीदवार उतारे तो जदयू को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि लोक लुभावन घोषणाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कुल मिलाकर कहें तो नुकसान, फायदा, नौकरी, मुआवजा भी अब जाति आधारित होगा।