सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के इस दौर में परीक्षाओं पर लगे संशय के बादलों को बहुत हद तक दूर करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि सितंबर महीने में छात्रों को परीक्षाएं देनी ही होंगी। प्रोमोट करने का परीक्षाओं के अलावा और कोई भी तरीका नही है। इस मामले में आदित्य ठाकरे की युवा सेना सहित कई याचिकाएं दायर की गई थी। 


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूजीसी का यह तर्क सही है कि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करने’ के लिए कराई जा रही है और परीक्षाओं के बिना डिग्री नहीं दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर विचार करने का अनुरोध किया गया था।


वैकल्पिक व्यवस्था के लिए तर्क देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा था कि छात्रों ने पांच सेमेस्टर पूरे किए हैं और उनके कम्यूलेटिव ग्रेड CGPA के आधार पर फाईनल ईयर के रिजल्ट घोषित किए जा सकते हैं। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे यह कहते हुए मनाने से इनकार कर दिया कि राज्य अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के बिना छात्रों को प्रमोट नहीं कर सकते। ऐसे में परीक्षाओं के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है।