बिहार विधानसभा चुनाव के किये जैसे जैसे दिन कम होते जा रहे हैं और चुनावी समर नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे हर दिन नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं। इसी क्रम में कभी नीतीश से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आज महागठबंधन का साथ छोड़ दिया है। इसी के साथ यह लगभग स्पष्ट है कि आने वाले कुछ दिनों में वह एनडीए के हिस्सा बनेंगे। श्याम रजक के जदयू से जाने के बाद मांझी की वापसी को डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।


खबरों के मुताबिक जीतनराम मांझी अपनी पार्टी का विलय जदयू में नही करेंगे बल्कि वह एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनेंगे। वह किसी भी तरह की जल्दबाजी नही करना चाहते और सीटों की बात सेट हो जाने पर ही कोई औपचारिक ऐलान करना चाहते हैं। खबरों की मानें तो मांझी 15 सीटों की मांग कर सकते हैं। साथ ही एक सीट वह एमएलसी के रूप में चाहते हैं। हालांकि एनडीए में बड़े दलों के बीच मांझी को 10+1 के फार्मूले पर मनाया जा सकता है।


महागठबंधन छोड़ने के ऐलान के बाद मांझी के बेटे संतोष कुंअर सुमन ने मीडिया से बताया कि हमने बहुत इंतजार किया लेकिन हमारी मांग नही सुनी गई न ही कोई तवज्जो दी गई। यही वजह है कि हमने महागठबंधन के साथ छोड़ गरीबों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। हालांकि उन्होंने एनडीए में शामिल होने की बात पर बस इतना कहा कि इसपर हम अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात करेंगे और फिर तय करेंगे कि अकेले लड़ना है, एनडीए के हिस्सा बनना है या तीसरे मोर्चे के विकल्प के बारे में सोचना है।