कोरोना वायरस के कहर के बीच इससे निपटने के लिए वैक्सीन बनाने को लेकर दुनियाभर के देशों के बीच होड़ जारी है। अमेरिका, रूस, भारत से लेकर चीन तक अलग-अलग शोध और ट्रायल के काम तेजी से चल रहे हैं, मगर असल सवाल अब भी वही है कि आखिर दुनिया को यह वैक्सीन मिलेगी कब? पिछले सप्ताह, एक टीवी इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी विशेषज्ञ एंथनी फौसी ने कहा था कि उन्हें यकीन है कि इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में करोना की वैक्सीन आ जानी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अगर यह वैक्सीन थोड़ी भी प्रभावी रही तो भी एक साल के भीतर दुनिया को वापस सामान्य स्थिति में लाने के लिए काफी साबित होगी।

आइए देखते हैं कि दुनियाभर में कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर कहाँ क्या-क्या हो रहा है।

• ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन ने मंगलवार को इस बात का ऐलान किया कि देश ने कोरोना वायरस वैक्सीन तक अपनी पहुंच बना ली है। उन्होंने कहा कि देश इसका निर्माण करेगा और पूरी आबादी को मुफ्त खुराक दी जाएगी। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने स्वीडिश-ब्रिटिश फार्मास्यूटिकल कंपनी ऑस्ट्राजेनेका के साथ डील की है ताकि वे जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर जिस दवा को तैयार कर रहे हैं, उसे हासिल की जा सके। उन्होंने कहा, “अगर वैक्सीन सफल रहती है तो हम इसे उत्साहपूर्वक बनाएंगे, आपूर्ति करेंगे और इसे ढाई करोड़ ऑस्ट्रेलियाई लोगों तक मुफ्त पहुंचाएंगे।”  

• वहीं, कोरोना वैक्सीन को लेकर चीन से भी खुशखबरी है। चीन में तैयार कोविड-19 वैक्सीन इस साल के आखिर तक बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है। चीन के सरकारी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि साल के अंत तक आने वाली इस वैक्सीन की कीमत करीब 10 हजार रुपये से ज्यादा (1000 युआन) होगी। द गुआंगमिंग डेली ने चाइना नेशनल फार्मास्यूटिक ग्रुप (शिनोफार्म) के ग्रुप चेयरपर्सन लियू जिंगझेन का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि तीसरे चरण की क्लिनकल (मान) ट्रायल और आवश्यक मार्केटिंग की प्रक्रिया दिसंबर तक पूरी करने के बाद एक यूनिट वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर देगी।

• अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत तक भारतीयों को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन मिल सकेगी। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्राजेनका कंपनी के सहयोग से तैयार वैक्सीन का पहले और दूसरे चरण का ट्रायल सफल रहा है। अब इस वैक्सीन का तीसरे और अंतिम चरण का ह्यूमन ट्रायल (एडवांस चरण ) शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र के पुणे में स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया भी इस वैक्सीन का साझेदार जो इसका उत्पादन करेगी। अगर सरकार इन्हें भी मंजूरी दे देती है तो यह भी प्रयोग के लिए जल्द ही उत्पादित होगा।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया भर के देशों को कोविड-19 वैक्सीन के लिए आसान और न्यायसंगत पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से एक वैश्विक समझौते का आह्वान किया है। कोवैक्स वैश्विक टीके की सुविधा अमीर देशों और गैर-लाभकारी संस्थाओं से वैक्सीन विकसित करने और इसे दुनिया भर में समान रूप से वितरित करने के लिए धन मुहैया कराएगी। 

• CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी बायो टेक्नोलॉजी कंपनी मॉडर्ना अमेरिका की पहली कंपनी है, जो संभावित कोविड-19 वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया से गुजर रही है। इस कंपनी का लक्ष्य है करीब 30 हजार वॉलंटियर्स को ट्रायल में शामिल करना। 

•रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते यह घोषणा की थी कि उनके देश ने कोविड-19 का विश्व का पहला टीका विकसित किया है, जो कारगर है और रोग के खिलाफ स्थिर प्रतिरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि उनकी एक बेटी को स्पुतनिक-V नाम का टीका लगाया गया है। हालांकि, इसके ट्रायल का तीसरा चरण पूरा नहीं हुआ है और पूरी दुनिया इसे संशय भरी निगाहों से देख रही है।