भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अब तक के सबसे सफलतम कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है। धोनी के संन्यास का फैसला,ये खबर सुनते ही कुछ दुखी हुए,कुछ मुँह लटका लिए,कुछ सदमे में चले गए,कुछ कोसने लगे,और कोई गलत सही बड़बड़ाने लगे लेकिन जो एक बात सब में एक जैसी थी वह यह थी की बड़ा से बड़ा विरोधी,कोहली का फैन या कोई भी धोनी के इस फैसले से खुश कोई नहीं था।ये करिश्मा है झारखण्ड के माही का,यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है,उसने वो सब पाया जो देश ने,टीम ने,और हम सब ने सोचा था,धोनी ने अनहोनी को होनी कर दिखाया,यह कमाल है।

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झारखण्ड के एक छोटे से मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले धोनी के कमाल आज भारतीय क्रिकेट की किताब में सुनहरे अक्षरों में लिखे हुए हैं,हम T-20 के अलावा वनडे वर्ल्डकप और चैंपियंस ट्रॉफी के विजेता हैं,टेस्ट में हम नंबर 1 धोनी की कप्तानी में पहुंचे,यहाँ हम शब्द का इस्तेमाल मैंने भारत में क्रिकेट के लिए पागलपन और हमेशा बस उम्मीद के साथ खेलने और देखने वालों के लिए किया है,धोनी ने अपने प्रयास,खेल,मेहनत और कप्तानी से 125 करोड़ लोगों का हर ख्वाब पूरा कर दिया।

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आलोचना और तारीफ़ में हमारी कोई बराबरी नहीं है,मैच जीतते ही हम पलकों पर बिठाते हैं,और हारते ही चप्पल जूतों की बरसात कर देते हैं,धोनी के सन्यास के बाद इसकी चर्चा इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि आज हम उनकी वजह से दुखी हैं लेकिन जब एक कप्तान हार गया हो और हम उसके घर,परिवार पर हमला कर रहे होते थे तब उसे कितना दुःख हुआ होगा,हार या जीत से हम और आप से ज्यादा टीम खिलाडी और कप्तान दुखी होता है,तब तो आप ने साथ दिया नहीं आज दुःख व्यक्त कर रहे हैं।

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धोनी का नाम से ज्यादा लंबा छक्का कौन भूल सकता है,ठन्डे दिमाग से लेने वाला फैसला जो सबसे ज्यादा पिट चुके बॉलर से भी मैच जितवा कर ले आये,चीते से भी तेज़ दौड़ कर जो रन चुरा सकता है,स्टंप उड़ा सकता है वो धोनी है,अटकलें हम धोनी के आने के बाद से लगातार लगाते रहे सच कोई नहीं हुई?वन मैच वंडर से लेकर किस्मत के भरोसे खेलने वाले खिलाड़ी तक हमने बहुत कुछ बोला,सोचा लेकिन फैसले की जब बात आई हम चौंकते रहे हैं,चाहे मैच के दौरान हो,शादी हो,फिल्म हो,प्रचार हो, आईपीएल हो,या टेस्ट मैच से सन्यास और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने का फैसला सब अचानक लेकिन ये इतना भी आसान नहीं होता,आज जब हम एक ऊंचाई और कुर्सी पर रहते हैं तब हम जगह नहीं छोड़ना चाहते धोनी ने तो कप्तानी भी यूँ ही अचानक छोड़ दी थी,क्यूंकि वो हमसे अलग है,हमसे महान् है और वह सबसे हटकर महेंद्र सिंह धोनी है।

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धोनी की जीवनी पर बनी फिल्म में हमने उन्हें कहते देखा है कि देश के लिए टीम में बदलाव जरुरी है,कुछ लोग बोझ बन गए हैं और नए लोगों को मौका मिलना चाहिए बस इसी में उनकी कप्तानी छोड़ने के पीछे की वजह भी छुपी हुई थी और अब सन्यास का फैसला भी कुछ इसी और इशारा करता है। आप ढूंढ सकें तो पता लगा लें,बाकी मीडिया कुछ भी कारण बताये मेरे हिसाब से धोनी ने देश और टीम के साथ अपने लिए भी इंसाफ किया होगा।उम्मीद तो यही है कि माही की क्रिकेट के बाद वाली सेकंड इनिंग भी शानदार होगी और वह देश का मान बढ़ाते रहेंगे।