बिहार विधानसभा चुनाव अपने नियत समय पर होंगे यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त स्पष्ट कर चुके हैं। कोरोना के समय मे यह टेढ़ी खीर है। दल असमंजस में हैं और वर्चुअल रैलियों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी है। इसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल  सबसे आगे आगे हैं। आरजेडी सहित महागठबंधन के दल इसमें पीछे छूटते नजर आ रहे थे हालांकि माहौल अब अचानक अलग सा नजर आ रहा है।

अब इस होड़ में बीजेपी, जदयू और अन्य मुख्य दलों के साथ अब पलूरल्स भी है। पुष्पम प्रिया चौधरी इस दौड़ में अब साथ-साथ नजर आ रही हैं। वह जिले वॉर दौरे और वहां रोजगार की संभावना, कृषि क्षेत्र के विकास के लिए संभावना, इंडस्ट्री डेवलपमेंट की संभावना शेयर कर रही हैं। वह लगातार बिहार के विकास की बात कर रही हैं। गरीब-पिछड़ों की बात कर रही हैं। उनके पास विज़न और विकास की योजनाओं की एक तस्वीर सी है जिसे दिखा कर वह मिशन बिहार को अमलीजामा पहनाना चाहती हैं।

अब तक वह लगभग बिहार के सभी जिलों का दौरा कर चुकी हैं। कुछ सीटों पर प्रत्याशी के नाम का ऐलान भी कर चुकी हैं। कहीं आत्मनिर्भर महिला उनके दल की प्रत्याशी है तो कहीं 26 साल का एक युवा किसान बीजेपी-राजद और जदयू जैसे दलों के सामने विज़न और अच्छे मकसद के साथ इनके सामने दम्भ भरता नजर आएगा। उम्मीद है पलूरल्स के अलावा आम आदमी पार्टी भी इस बार दावेदारी कर सकती है।

ऐसे में इस बार का बिहार चुनाव दिलचस्प होगा यह पक्का है। नए दलों की एंट्री और पुराने दलों के आपसी वाद-विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन और एनडीए के दलों का क्या हश्र होता है। नीतीश को अपने तथाकथित विकास पर भरोसा है वहीं राजद को एन्टी गवर्नमेंट लहर का आसरा है। इस आग में घी का काम कोरोना, बेरोजगारी और भ्रस्टाचार के मुद्दे करेंगे। ऐसे में यह कोई आश्चर्य नही अगर पुष्पम प्रिया चौधरी का पलूरल्स इस होड़ में आगे निकल जाए।