राहुल भरोसे पायलट का ‘प्लान’, क्या होगा गहलोत सरकार का अंजाम?

इस मुलाकात के बाद सचिन के पास आगे की राजनीति के लिए तीन रास्ते होंगे।

ATTENTION EDITORS - THIS PICTURE IS 10 OF 22 TO ACCOMPANY SPECIAL REPORT INDIA/GANDHI. SEARCH FOR KEYWORD "GANDHI" TO SEE ALL IMAGES PXP01-22. Rahul Gandhi, a lawmaker and the son of India's ruling Congress party chief Sonia Gandhi, watches an ICC Cricket World Cup semi-final match in Mohali in this March 30, 2011 file photo. Nothing like the Gandhi family political franchise exists in the world today. A member of the family has essentially run India for two-thirds of the period since independence from Britain in 1947. To match Special Report INDIA/GANDHI REUTERS/Raveendran/Pool/Files (INDIA - Tags: POLITICS)

राजस्थान में राजनीतिक माहौल उफान पर है। मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी रहे सचिन पायलट एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। इसका फिलहाल कोई भी समाधान नही निकल सका है। इन सब के बीच जहां कभी सचिन के बीजेपी खेमे में जाने की बात आई तो कभी नई पार्टी बनाने की, हालांकि खुद पायलट स्पष्ट कर चुके हैं कि वह बीजेपी में नही जाएंगे।

अगर संख्याबल की बात करें तो गहलोत सरकार आर कोई खतरा फिलहाल नही है और इन सब मे एक और बात जो गहलोत के पक्ष में है वह यह है कि बीजेपी खेमा शुरुआती विवाद के बाद से तटस्थ चल रहा है। खास कर पूर्व मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे सिंधिया और गहलोत राजनीति के धुर विरोधी जरूर हैं लेकिन इनके आपसी रिश्ते मधुर रहे हैं।

इन सभी विवादों के बीच सचिन पायलट अब दुबारा कांग्रेस में वापसी की राह पकड़ते नजर आ रहे हैं। सिंधिया के नक्शेकदम पर चलने का उनका राजनीतिक प्लान पूरी तरह फ्लॉप नजर आ रहा है। इसके अलावा अब उनके खेमे के विद्यायक भी दुबारा गहलोत खेमे और कांग्रेस का रुख करने लगे हैं। यही वजह है कि अब सचिन पायलट कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से बात कर गहलोत पर दबाव बनाने का आखिरी प्रयास कर लेना चाहते हैं।

उन्होंने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। अभी तक राहुल गांधी की तरफ से इस बारे में कोई बयान नही आया है हालांकि उम्मीद है कि 15 अगस्त से पहले यह मुलाकात कभी भी हो सकती है। इस मुलाकात के बाद सचिन के पास आगे की राजनीति के लिए तीन रास्ते होंगे। पहला रास्ता होगा कांग्रेस में वापसी का, दूसरा अगर कांग्रेस में बात न बनी तो वह बीजेपी का दामन थाम सकते हैं और आख़िरी विकल्प के तौर पर वह अपने नए दल के गठन का एलान कर सकते हैं।

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