दिल्ली मेट्रो का संचालन पिछले कई महीनों से ठप है। दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो के लिए अब अपना कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है। दिल्ली मेट्रो ने लोकन चुकाने के लिए केंद्र सरकार से मदद करने की गुजारिश की थी।यह विवाद तब और बढ़ गया है जब केंद्र ने पहले यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि मेट्रो राज्य की जिम्मेदारी है। वहीं अब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने केंद्र के इस बयान पर हमला बोला है। एक समाचार पत्र से विशेष बातचीत में केंद्र के इस रवैये की आलोचना करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह अकेले हमारी जिम्मेदारी नही है।

इस मामले पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने  कहा कि यह अकेले हमारी जिम्मेदारी नहीं है। मेट्रो का किराया बढ़ाना होता है, तब केंद्र हमसे नहीं पूछता है। बोर्ड में जब निदेशक तय करने की बात होती है, तब केंद्र नहीं पूछता है। कॉरिडोर की मंजूरी देनी होती है, तब भी हमारी नहीं सुनी जाती, तो हम अकेले पैसे क्यों चुकाएं। राज्य सरकार का कहना है कि जब मेट्रो को लेकर केंद्र सभी फैसले अकेले करता है तो पैसे देने की बारी में राज्य सरकार की जिम्मेदारी कैसे हो सकती है?

दिल्ली मेट्रो लॉकडाउन की वजह से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। पिछले 18 सालों में यह पहला मौका है जब दिल्ली मेट्रो अपना लोन ससमय नही चुका पाई है और उसे मदद की दरकार है।अभी तक दिल्ली मेट्रो के परिचालन को लेकर भी कोई अपडेट किसी भी सरकार के स्तर से नही आया है। हालांकि अनुमान है कि इस महीने के अंत तक मेट्रो का परिचालन शुरू हो सकता है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के मुताबिक दिल्ली मेट्रो को 2020-21 में कुल 1242 करोड़ रुपये से अधिक की किस्त चुकानी है। इसमें 434.15 करोड़ रुपये ब्याज और 808.68 करोड़ मूलधन है। पहली तिमाही बीत जाने के बाद मेट्रो ने सिर्फ 79.19 करोड़ रुपये ही चुकाया है, जो कि सिर्फ ब्याज का एक हिस्सा है।