भारत एक कृषि प्रधान देश है, ऐसा हम स्कूल के दिनों में निबंध लिखने और पढ़ने के दौरान सुनते आए हैं। इस कृषि प्रधान देश की ही एक और तस्वीर है जो बदलते भारत के परिवेश में शर्मनाक और भयावह है। यह तस्वीर है भारत के भाग्य विधाता किसान की, जो आये दिन आत्महत्या करने को मजबूर है। आपको और हमको अन्न देने वाला यह किसान किस हाल में है, या भारत की कृषि व्यवस्था कहाँ है अगर आपको इसकी हकीकत जाननी है तो कभी महाराष्ट्र जाइए, यूपी के बुंदेलखंड जाइए, गुजरात के सौराष्ट्र जाइए, तस्वीर स्पष्ट होगी और आत्महत्या के पीछे के कारण भी समझ आ जाएंगे।


केंद्र सरकार के आंकड़ों की ही मानें तो भारत मे हर साल 12 हजार किसान आत्महत्या कर लेते हैं। आंकड़े बेशक 2017 के हैं लेकिन तस्वीर आज भी वही है जो पहले थी।  2015 की बात करें तो 12602 किसानों ने आत्महत्या कर ली, इनमे से 8007 लोग उत्पादक किसान थे और 4595 कृषि मजदूर या श्रमिक थे। हालांकि इन सब के पीछे वजह एक थी वह है कर्ज का बोझ।

सबसे ज्यादा आत्महत्या वाले प्रदेश की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे आगे रहा है, इसके बाद क्रमशः कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों का नंबर आता है। 2015 से पहले वाले साल 2014 की बात करें तो 12360 किसानों ने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया वहीं 2013 में यह आंकड़ा 11772 का था। यह शर्मनाक तस्वीर उस भारत की है जिसे हम कृषि प्रधान बताते हैं। अब आप सोचिए और समझिए कि ऐसा क्यों है।

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