सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। आज हम दोस्तों के बीच हों, परिवार के साथ हों या ऑफिस में हमारा ध्यान इसी पर होता है। जैसे क्या ट्रेंड्स चल रहा, किस मुद्दे पर लोग लिख रहे, क्या बातें चल रही मतलब चापलूसी, कानाफूसी से लेकर चमचागिरी तक आज हम हर बात के लिए सोशल मीडिया पर आश्रित हैं। खैर आज अचानक पीएम मोदी के एक ट्वीट ने हलचल मचा दी।पीएम ने सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म को छोड़ने की बात क्या कही एक हलचल सी मच गई है।


भारत मे सोशल मीडिया का प्रयोग एक तरह से कहें तो पीएम मोदी ने ही सिखाया। 2010-2011 के वक़्त जब लोग फेसबुक, ट्विटर, गूगल एंड्राइड के बारे में सीखने की सोच रहे थे तब तक गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी सोशल मीडिया पर अपनी गहरी पैठ बना चुके थे। 2012 आते आते वह एक लोकप्रिय चेहरा बन चुके थे। उनके नेतृत्व की छवि पूरे देश को सोशल मीडिया ने दिखाई। यूं अगर कहें कि पीएम कैंडिडेट घोषित करवाने में सोशल मीडिया का जहां योगदान रहा वहीं बाद में प्रशांत किशोर ने पहली बार खुले तौर पर इसका उपयोग भारत कस चुनावों को प्रभावित कराने में किया। यह प्रयोग सफल रहा और डिजिटल मार्केटिंग का चाय पे चर्चा जैसा फार्मूला हिट साबित हुआ।


मोदी की न सिर्फ लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ा बल्कि वह गुजरात से निकल देश के मन-मष्तिष्क के पटल पर एक अमिट छाप छोड़ने में सफल रहे। पहले पीएम कैंडिडेट बने, बाद में देश के कोने कोने से मिले समर्थन से सत्ता के शिखर पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद भी पीएम ने इसको भुलाया नही। वह लगातार एक्टिव रहे और लगातार न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में सुर्खियों में रहे। वह दुनिया मे सबसे ज्यादा फॉलो किये जाने वाले नेताओं में हैं। वह हर जानकारी और चर्चा के लिए इस माध्यम का उपयोग करते हैं।


अब सवाल सभी के मन मे यह है कि ऐसा क्या हुआ कि पीएम मोदी एकदम इस माध्यम से व्यथित हो उठे और उन्होंने इसे छोड़ने तक का एलान कर दिया? लोग न सिर्फ पीएम के इस मैसेज को देख चिंता में डूब गए बल्कि उनसे निवेदन करते नजर आए की ऐसा न करें। इसकी दो तीन वजहें साफ नजर आती है। पहली वजह सोशल मीडिया के इस दौर ने जहां आम आदमी को ताकत दी वहीं यह फर्जी खबरें और अफवाहें फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बना। इसका भयावह उदाहरण हमने दिल्ली दंगे के रूप में देखा। दूसरा विदेशी माध्यमों पर किसी भी तरह से पकड़ बनाना आसान नही इसलिए कहीं न कहीं शायद पीएम अप्रत्यक्ष रूप से इससे दूर होने की बात कर रहे हैं। तीसरी बात संविधान से मिली अभिव्यक्ति की आज़ादी का सबसे ज्यादा गलत फायदा सोशल मीडिया के प्रयोग से उठाया जा रहा है। ऐसे में कहीं न कहीं यह बात भी मन को दुखी करती है। खैर रविवार तक पीएम मोदी अपने अगले कदम के बारे में सूचित करेंगे। हमारा आग्रह है पीएम चाहें तो फेक और अफवाहों से भरी खबरों पर अंकुश लग सकता है। इसलिए आप एक्टिव रहें अपना मार्गदर्शन देते रहें।