ई-रिक्शा होगी भविष्य की सवारी!

रॉ मैटेरियल से लेकर कुशल कारीगरों का अभाव, इसके प्रयोग की सही विधि,चार्जिंग पॉइंट, महंगी बिजली,खराब सड़कें और बाहर से कल-पुर्जे का आयात इसको पलीता लगा रहे हैं।

देश ही नही बल्कि पूरी दुनिया आज प्रदूषण को लेकर चिंतित है। न सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली बल्कि दुनिया भर में प्रदूषण एक जहर के समान लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर रहा है। ऐसे में सरकारें तमाम उपाय कर रही हैं। जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ाने का फैसला किया बल्कि लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ी सब्सिडी भी दी जा रही है।


भारत के इलेक्ट्रिक बाज़ार की बात करें तो आज की तारीख में कई बड़ी कंपनियां जोर-शोर से इलेक्ट्रिक वाहन के बाज़ार में कदम जमाने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि अभी तक कौन कितना आगे और सफल है यह कहना थोड़ा मुश्किल है। इन सब के बीच एक बात गौर करने वाली है। वह यह है कि आज इलेक्ट्रिक वाहन खास कर ई-रिक्शा अब बड़े शहरों से निकल कर न सिर्फ छोटे शहरों तक पहुंच चुके हैं बल्कि रोजगार के बेहतर साधन भी साबित हो रहे हैं।


आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें या बिहार और झारखंड के किसी छोटे से लेकिन तेजी से आगे बढ़ते शहर की तो प्रदूषण को लेकर न सिर्फ जागरूकता आई है बल्कि अभी से लोग सचेत हैं। यही वजह है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में जहां तथाकथित मंदी कि चर्चा है वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के बाज़ार में अब भी होड़ मची हुई नजर आती है। इसको समझें तो आज की तारीख में दर्जन भर से ज्यादा छोटी बड़ी कंपनियां इस बाजार में प्रतिस्पर्धा करने को आतुर हैं। हालांकि इनकी समस्याएं भी असीमित हैं। यह उभरता मार्केट जरूर है लेकिन रॉ मैटेरियल से लेकर कुशल कारीगरों का अभाव, इसके प्रयोग की सही विधि,चार्जिंग पॉइंट, महंगी बिजली,खराब सड़कें और बाहर से कल-पुर्जे का आयात इसको पलीता लगा रहे हैं।


इसी को समझने के लिए हमने बात की भारत ई-रिक्शा बाज़ार में अपनी शानदार और दमदार उपास्थिति दर्ज कराने वाली जांगिड़ मोटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश जांगिड़ से, हमने यह समझने का प्रयास किया कि कल पुर्जों का आयात कितनी बड़ी चुनौती है? उनका जवाब था यह हमारे लिए नही है क्योंकि हम मेक इन इंडिया के तहत रिक्शे के 80% सामान भारत मे तैयार करते हैं जिसकी गुणवत्ता सबसे अच्छी और खर्च कम है। इसके बाद हमने रिक्शा के दाम और गुणवत्ता को लेकर सवाल किया, इसपर उनका जवाब था कि यह स्वाभाविक है कि बाहर से जब सामान आप आयात करेंगे और असेम्बल करेंगे तो दाम बढ़ेगा जबकि अगर यहीं प्रोडक्शन होगा और यहीं असेम्बलिंग होगी तो न सिर्फ यह सस्ता होगा बल्कि मेंटेनेंस कॉस्ट भी कम होगी। यही वजह है कि हम इस मामले में फिलहाल सबसे आगे हैं।


ई-रिक्शा के भविष्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक जो रिस्पांस है वह उत्साहवर्धक है। न सिर्फ दिल्ली बल्कि बिहार,झारखंड,यूपी,गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। आपको बता दें कि जांगिड़ ई-रिक्शा का बाज़ार के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है। साथ ही अपने दमदार और आकर्षक ऑफर्स और मजबूती की वजह से यह नित नए मुकाम स्थापित कर रहा है। कुल मिलाकर कहें तो भारत मे ई-रिक्शा के बाज़ार में अपार संभावना नजर आती है।

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