मोटर वाहन अधिनियम नही,ट्रैफिक पुलिस मनमानी अधिनियम कहिए जनाब!

पहले एक कार्ययोजना पर काम करें,जागरूकता लाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के दिशा में काम करें,उसके बाद आपके तय नियम और कानून का पालन न हो तो बेशक जुर्माना लगाएं,जेल में डाल दें।

1 सितंबर से देश मे नया मोटर वाहन अधिनियम कानून लागू हुआ है। इस कानून ने न सिर्फ सुर्खियां बटोरी हैं बल्कि मौज और मजे के लिए भी खूब इस्तेमाल हो रहा है। देश के अलग अलग राज्यों,इलाकों जिलों,कस्बों से आ रहे रुझान ( चुनावी परिणाम से पहले आम तौर पर प्रयोग होने वाला शब्द) आने शुरू हो गए हैं। इसमें पब्लिक की गलतियों की बात जितनी होनी चाहिए वह तो है ही,पुलिस वालों की नौकरी पर भी यह आफत की तरह बरस रहा है। मोदी सरकार में पब्लिक के साथ पुलिस को सुधारने का यह नायाब तरीका ढूंढा है। अब आप सोचने पर मजबूर होंगे भुक्तभोगी तो पब्लिक है ऐसे में पुलिस कहाँ से आ गई? मैं बता देता हूँ। दिल्ली से लेकर बिहार और कई राज्यों से मिली खबरों के अनुसार 15 हज़ार की स्कूटी या बाइक का चालान 40 हज़ार के पार गया। दरोगा जिन्होंने ने चालान काट दिया वह खुद सस्पेंड हुआ तो ऐसे में यह दोनो के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।


भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक गाना काफी वायरल हुआ था। परसो रात के बाद दो दिन अवकाश में मैंने भी अपनी भाषा से संबंधित कुछ गाने यू ट्यूब पर खंगालने शुरू किए। इसी दौरान एक गाना वायरल गानों की लिस्ट में  सामने आया,गाने के बोल कुछ इस तरह थे,”तेरे संग कभी नही जाऊंगा होटल, तू तो वीडियो बना के कर देगी वायरल”, इसी गाने को देखने के ठीक बाद सोशल मीडिया पर बिहार के बक्सर से एक दरोगा जी का वीडियो देखा,जिसमे दरोगा जी पूरे रौब मे बिना हेलमेट अपनी रंगदारी दिखा रहे थे। इसके बाद आज पता लगा कि दरोगा जी सस्पेंड हो गए।


खैर यह खबरें महज बानगी हैं।ऐसी न जानें कितनी खबरें और सलाह एक सितंबर से लेकर अब तक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। सच लिखा जाए तो यह अधिनियम कम और किसी फिल्म की पटकथा ज्यादा लगता है। दक्षिण फ़िल्म इंडस्ट्री की एक मूवी कुछ दिनों पहले देख रहा था नाम था,”डैशिंग सीएम भरत”, पटकथा कुछ ऐसी थी कि एक लड़का विदेश से आता है और मजबूरी और हालात की वजह से सीएम बनना पड़ता है और उसके बाद ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए वह फाइन इम्पोज़ करने का आईडिया विधानसभा में रखता है। भारत की संसद द्वारा यह लाया गया बिल इसी के तर्ज पर नजर आता है। हालांकि माफ कीजिये जहां सड़क,लाइट्स और ट्रैफिक का अकाल हो वहां यह अंग्रेजों के जबरन टैक्स और गुलामी से प्रतीत होता है।


सोशल मीडिया से साभार लेते हुए सुझावों की कुछ कड़ी में बस इतना कहना है कि पहले इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलोपमेन्ट की बात करते, मूलभूत सड़कों को सुधारते,ट्रैफिक पुलिस को अधिकार देते,लोगों में जागरूकता लाने का एक प्रयास करते और उसके बाद भी न मानने पर आप हेलमेट के लिए फाइन कर तुरंत हेलमेट देते,बीमा के लिए फाइन कर ऑन द स्पॉट बीमा कराते, रश ड्राइविंग के केस में उनसे कारण समझ एक सूची अलग से तय करते,लाइसेंस न होने की खामियों को परखते और बनवाने के लिए आधार कैम्प जैसे कुछ कार्ययोजना पर विचार करते लेकिन ऐसा नही हुआ। बस एक कानून आया और थोप दिया गया। आप चाहते तो एक गलती के लिए जुर्माना तय कर दूसरे गलती पर माफी दे सकते थे लेकिन नही, ऐसा नही हुआ बल्कि जो व्यक्ति इससे अनजान है,गरीबी और रोटी से जूझ रहा है वह इसका सबसे बड़ा शिकार है।


सड़क और राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों और मंत्री से बस यही अनुरोध है कि पहले एक कार्ययोजना पर काम करें,जागरूकता लाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के दिशा में काम करें,उसके बाद आपके तय नियम और कानून का पालन न हो तो बेशक जुर्माना लगाएं,जेल में डाल दें। आप लोगों की जिंदगी आसान करने के प्रयास में उन्हें एक बड़ी मुसीबत में फंसा चुके हैं। कृपया ध्यान दें और यथाउचित बदलाव करें जो जनहित में रहे,यह देश आपका आभारी रहेगा।

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